- कांग्रेस ने साफ किया है कि वह संसद में परिसीमन बिल का विरोध करेगी और समान विचारधारा वाले दलों को साथ लाने की कोशिश करेगी.
- संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा.
- प्रस्तावित परिसीमन व्यवस्था के तहत लोकसभा की अधिकतम सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने का प्रावधान है.
ST.News Desk
Delimitation Bill :संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन बिल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह संसद में परिसीमन बिल का विरोध करेगी। पार्टी का कहना है कि वह इस मुद्दे पर समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ खड़ी होगी।
परिसीमन बिल : संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई 2026 से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। करीब चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ा सकती है। विपक्ष को आशंका है कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े तीन विधेयकों को दोबारा पारित कराने की कोशिश कर सकती है।
सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुई कांग्रेस की बड़ी बैठक

Delimitation Bill :मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने की।
परिसीमन बिल : बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, शशि थरूर, पी. चिदंबरम, कुमारी शैलजा और मनीष तिवारी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ सांसद शामिल हुए।
Delimitation Bill :बैठक में मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने वाले मुद्दों, विपक्षी दलों के साथ तालमेल और परिसीमन बिल के खिलाफ रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
परिसीमन बिल का विरोध करेगी कांग्रेस
Delimitation Bill :कांग्रेस संसदीय दल की बैठक के बाद पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस को सूचना मिली है कि सरकार परिसीमन बिल को फिर से संसद में ला सकती है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस विधेयक का विरोध करेगी और समान सोच रखने वाले दूसरे राजनीतिक दलों के साथ मिलकर संसद में अपनी बात रखेगी।
परिसीमन बिल : जयराम रमेश के मुताबिक, सरकार की ओर से मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले विधेयकों की आधिकारिक सूची अभी विपक्ष को नहीं मिली है। सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें सत्र के एजेंडे की जानकारी मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस का आरोप है कि कई बार सर्वदलीय बैठक केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाती है।
अप्रैल में पेश किए गए थे परिसीमन से जुड़े तीन बिल
Delimitation Bill :सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक पेश किए थे। इनमें संविधान का 131वां संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 शामिल थे।
Delimitation Bill :इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का परिसीमन करना और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा की अधिकतम सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इनमें राज्यों से अधिकतम 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सदस्य चुने जा सकेंगे।
Delimitation Bill :अप्रैल के बजट सत्र में सरकार संविधान संशोधन विधेयक को जरूरी विशेष बहुमत से पारित नहीं करा सकी थी। इसके बाद से यह सवाल बना हुआ है कि क्या सरकार मानसून सत्र में विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का समर्थन जुटाकर विधेयक को दोबारा आगे बढ़ाएगी।
परिसीमन बिल में क्या है बड़ा बदलाव?
Delimitation Bill :प्रस्तावित विधेयकों के तहत अगला परिसीमन नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आधार पर कराया जाना है। मौजूदा स्थिति में इसका अर्थ है कि परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Delimitation Bill :विधेयक में लोकसभा की सीटें बढ़ाने के साथ राज्यों के बीच सीटों का बंटवारा आबादी के अनुपात में करने का प्रस्ताव है। इससे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरी ओर, जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी और छोटे राज्यों ने अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी घटने की आशंका जताई है।
यही कारण है कि परिसीमन का मुद्दा केवल निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदलने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर लोकसभा में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक ताकत, केंद्र में सरकार गठन और राष्ट्रीय नीतियों पर राज्यों के प्रभाव पर पड़ सकता है।
NCP शरद गुट ने रखी समर्थन की शर्त

Delimitation Bill :शरद पवार की पार्टी NCP (SP) ने परिसीमन बिल को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा नहीं की है। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनकी पार्टी तभी प्रस्ताव पर विचार करेगी, जब केंद्र सरकार प्रत्येक राज्य की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की स्पष्ट गारंटी दे।
सुप्रिया सुले ने परिसीमन के फॉर्मूले और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की भी मांग की है। उन्होंने साफ किया कि NCP (SP) अभी विपक्षी INDIA गठबंधन के साथ है और विधेयक पर अंतिम फैसला गठबंधन के भीतर चर्चा के बाद किया जाएगा।
क्या सरकार के पास हैं जरूरी सांसद?
Delimitation Bill :संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होती है। इसके तहत विधेयक को सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ-साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन से पारित कराना होता है।

इसलिए सरकार को वास्तव में कितने सांसदों की जरूरत होगी, यह मतदान के दिन सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या और वोटिंग में हिस्सा लेने वाले सांसदों पर निर्भर करेगा। 360, 354 या किसी अन्य निश्चित संख्या को अंतिम संवैधानिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
फिर भी सरकार और विपक्ष दोनों क्षेत्रीय दलों का समर्थन जुटाने में लगे हैं। कांग्रेस की कोशिश होगी कि INDIA गठबंधन के सभी दल परिसीमन के सवाल पर एकजुट रहें। वहीं, सरकार उन दलों को साथ लाने का प्रयास कर सकती है, जो राज्यों की सीटों में समान बढ़ोतरी या किसी विशेष परिसीमन फॉर्मूले के आधार पर बिल का समर्थन करने को तैयार हो सकते हैं।
Delimitation Bill :मानसून सत्र में परिसीमन बिल पेश किया जाता है या नहीं, इसकी आधिकारिक तस्वीर सर्वदलीय बैठक और सरकार के विधायी एजेंडे के सामने आने के बाद साफ होगी। हालांकि कांग्रेस के ऐलान से यह तय हो गया है कि बिल संसद में आया तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार राजनीतिक और संवैधानिक मुकाबला देखने को मिलेगा।

