crossorigin="anonymous"> धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा, NEET विवाद के बीच बड़ा फैसला

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा : NEET विवाद के बीच देश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 विवाद और CJP के विरोध प्रदर्शन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जानिए इस्तीफे की पूरी वजह, उनका पूरा बयान और राजनीतिक असर।

नई दिल्ली: देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी थे और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही थी।

धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा संदेश साझा करते हुए अपने इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के हित, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।

चार दशक की शिक्षा सेवा का किया उल्लेख

अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले चार दशकों से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार से जुड़े रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि मजबूत और समावेशी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की नींव रख सकती है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और सपनों का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि का नैतिक दायित्व है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उन्हें शिक्षा मंत्रालय संभालने का अवसर मिला, जिसके लिए वे आभारी हैं।

NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?

धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच CBI को सौंप दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने परीक्षा को रद्द करने, दोबारा परीक्षा आयोजित करने और भविष्य में CBT (Computer Based Test) मोड लागू करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना थी। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों ने मिलकर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित हुई।

“पहले दिन से जिम्मेदारी स्वीकार की”

अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी ली और कभी भी इससे पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी प्रतिभाशाली छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया की वजह से प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई छात्रों ने सफलता हासिल की।

हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।

जंतर-मंतर प्रदर्शन और राष्ट्रहित का हवाला

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के पीछे जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन और देशभर के राजनीतिक माहौल का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस स्थिति का फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतें उठाएं या छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में उलझ जाए। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को आंदोलन और राजनीति से दूर रहकर अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेजने का निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री और मंत्रालय का जताया आभार

अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और उन सभी लोगों का भी धन्यवाद किया जिनके साथ उन्हें काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे भविष्य में भी देश, ओडिशा की जनता तथा युवाओं के लिए कार्य करते रहेंगे।

राहुल गांधी के साथ बयानबाजी भी रही चर्चा में

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि वे छात्रों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।दूसरी ओर राहुल गांधी लगातार NEET परीक्षा विवाद को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। ऐसे में यह इस्तीफा राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक असर क्या हो सकता है?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी और सरकार शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए आगे कौन-कौन से कदम उठाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि NEET परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सरकार नए फैसले ले सकती है।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री के पद छोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। आने वाले दिनों में CBI जांच, परीक्षा सुधार और नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर पूरे देश की नजर रहेगी।


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