- बाढ़ प्रभावित परिवारों की जिंदगी इस समय बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रही है
कटिहार: बिहार के कटिहार जिले में गंगा और कोसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान के कारण कुरसेला प्रखंड के दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई इलाकों में घरों में पानी प्रवेश कर गया है, जिसके बाद लोग अपने परिवार और मवेशियों के साथ सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तलाश में जुटे हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों की जिंदगी इस समय बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रही है। कहीं लोग प्लास्टिक के ड्रमों को जोड़कर बनाई गई अस्थायी नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं तो कहीं तिरपाल और प्लास्टिक की पन्नी के सहारे अस्थायी आशियाना बनाकर रहने को मजबूर हैं।
जलमग्न गांवों में बेबस जिंदगी

कुरसेला प्रखंड की पूर्वी मुरादपुर पंचायत के बसुहार मजदिया, तीनघरिया, खेरिया समेत करीब आठ गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। इन गांवों में जगह-जगह पानी भर जाने से सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाढ़ पीड़ितों परेशानी बताई, उनका कहना है कि घरों में पानी घुसने के बाद उनके सामने रहने और आने-जाने का संकट पैदा हो गया है। कई परिवारों ने प्लास्टिक के ड्रमों को जोड़कर अस्थायी नाव तैयार की है। इसी के सहारे वे जरूरी सामान लाने-ले जाने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, प्लास्टिक की पन्नी और तिरपाल के सहारे ऊंचे स्थानों पर अस्थायी ठिकाने बनाए गए हैं।
बच्चों और मवेशियों के साथ रेलवे लाइन किनारे शरण
बाढ़ से प्रभावित कुछ परिवारों ने अपने मासूम बच्चों और मवेशियों के साथ रेलवे लाइन और माल गोदाम के किनारों पर शरण ले रखी है। हालांकि, इन स्थानों पर भी उनकी परेशानियां कम नहीं हुई हैं। मवेशियों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। इसके साथ ही चारे की भी भारी कमी बताई जा रही है। ऐसे में परिवारों के सामने बच्चों और पशुओं दोनों की सुरक्षा और भोजन का संकट बना हुआ है।

मुख्य संपर्क मार्ग पर पानी, आवागमन ठप
बाढ़ के कारण पत्थर टोला जाने वाला मुख्य संपर्क मार्ग भी पानी में डूब गया है। सड़क पर पानी भरने के कारण कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। पत्थर टोला, गुमटी टोला, मोकना टोला और मेहर टोला के विद्यालयों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है और स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां बाधित हो गई हैं।
गंगा-कोसी के कटाव से सैकड़ों एकड़ जमीन प्रभावित
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर साल आने वाली बाढ़ के साथ नदी का कटाव भी उनके लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, वर्षों से जारी कटाव के कारण सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा और कोसी नदियों में समा चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कटाव की समस्या का अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। हर साल बाढ़ आने पर उन्हें अपने घर और खेत छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ता है।
राहत सामग्री नहीं मिलने का आरोप
बाढ़ प्रभावित परिवारों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में अब तक प्रशासन या अंचल कार्यालय की ओर से उनकी पर्याप्त सुध नहीं ली गई है। पीड़ितों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में न तो पर्याप्त नावों की व्यवस्था की गई है और न ही सूखा राशन तथा प्लास्टिक शीट जैसी जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी चिंता भोजन, पीने के पानी और सुरक्षित आवागमन को लेकर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने और प्रभावित परिवारों के लिए नावों की व्यवस्था करने की मांग की है।
पेयजल का संकट, जहरीले जीव-जंतुओं का डर
खर्राधार के पास सड़क पर पानी चढ़ने और लगातार जलस्तर बढ़ने के कारण लोगों के सामने शुद्ध पेयजल का संकट भी गहरा गया है। बाढ़ के पानी से जलस्रोत प्रभावित होने के कारण ग्रामीणों को साफ पानी हासिल करने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा, बाढ़ के पानी में विषैले जीव-जंतुओं के आने-जाने का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता रहती है।
प्रशासन से राहत और स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री, नाव, पीने का साफ पानी, पशुओं के लिए चारा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही लोगों का कहना है कि केवल बाढ़ के दौरान राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। गंगा और कोसी के कटाव से प्रभावित इलाकों के लिए स्थायी समाधान की जरूरत है। फिलहाल लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच कुरसेला के बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की ओर है कि उन्हें राहत कब तक मिलती है।

