- निठारी कांड में आरोपी रहे और बाद में सभी मामलों में बरी हुए सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में मिला है.
- कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में रह रहा था और चाय की छोटी दुकान चला रहा था.
- पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. मौत की सही वजह पोस्टमार्टम और जांच के बाद साफ होगी.
उत्तर प्रदेश के नोएडा के चर्चित निठारी कांड में आरोपी रहे और बाद में अदालत से बरी हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई है. शुक्रवार को उसका शव उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में सप्त सरोवर रोड पर एक चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला. यह दुकान लाल माता मंदिर के पास बताई जा रही है. शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, हालांकि मौत की अंतिम वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था कोली
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था. हाल के दिनों में वह भूपतवाला क्षेत्र में एक छोटी चाय की दुकान चला रहा था. इसी दुकान के अंदर उसका शव रस्सी के फंदे से लटका मिला.
घटना की जानकारी मिलने के बाद सप्तऋषि चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है. पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. इसलिए कोली की मौत के पीछे की वजह को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है.
अल्मोड़ा का रहने वाला था सुरेंद्र कोली
पुलिस जांच में मृतक की पहचान उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के रहने वाले सुरेंद्र कोली के रूप में हुई. पहचान की पुष्टि होने के बाद उसके परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत से पहले कोली किन लोगों के संपर्क में था और पिछले कुछ दिनों में उसकी गतिविधियां क्या थीं.
नवंबर 2025 में जेल से बाहर आया था
करीब दो दशक तक चले कानूनी घटनाक्रम के बाद सुरेंद्र कोली 12 नवंबर 2025 को ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा हुआ था. उससे एक दिन पहले 11 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े उसके आखिरी लंबित मामले में भी दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था. अदालत ने आदेश दिया था कि अगर किसी दूसरे मामले में उसकी जरूरत नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए.
इससे पहले जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें कोली को 12 मामलों में बरी किया गया था. इसके बावजूद एक मामले में उसकी सजा बनी हुई थी. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार करते हुए उस आखिरी मामले में भी उसे बरी कर दिया.
2006 में सामने आया था निठारी कांड
निठारी मामला 29 दिसंबर 2006 को उस समय देशभर में चर्चा में आया, जब नोएडा के निठारी इलाके में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे स्थित नाले से बच्चों के कंकाल और मानव अवशेष मिले थे. इसके बाद आसपास के इलाकों में तलाशी और खुदाई की गई और कई अन्य अवशेष बरामद हुए. जांच के दौरान पंढेर और उसके घरेलू कर्मचारी सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया था.
अलग-अलग मामलों में ट्रायल कोर्ट ने कोली को कई बार दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ चल रहे 12 मामलों में उसे बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने सबूतों और जांच प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए थे. पंढेर को भी उसके खिलाफ चल रहे संबंधित मामलों में राहत मिली थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इन बरी किए जाने वाले फैसलों में दखल देने से इनकार कर दिया.
अब कोली की हरिद्वार में हुई मौत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है. फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौके से मिले सबूत और अन्य परिस्थितियों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है.

