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new dress in parliament

संसद भवन कर्माचारियों की नई वर्दी पर शुरू हुई राजनीति, ‘‘सिर्फ कमल ही क्यों? मोर क्यों नहीं या बाघ क्यों नहीं?

Posted on September 12, 2023 By Sanchar Times News

नयी दिल्ली। कुछ ही दिनों में संसद का विशेष सत्र शुरू हो जाएगा जो कि 18 सितंबर से 22 सितंबर तक जारी रहने वाला है। इस सत्र को लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी है। अब तक ये सामने नहीं आया है कि इस सत्र को क्यों बुलाया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस सत्र के दौरान ही संसद के नए भवन का विधिवत पूजन किया जाएगा और इसमें प्रवेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि 19 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी भी है, ऐसे में नए भवन में सदन की कार्यवाही की शुरुआत हो सकती है। नए भवन में संसद भवन के कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में भी खास बदलाव किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए संसद भवन के स्टाफ की यूनिफॉर्म भी बदली जा सकती है। इसके लिए कर्मचारियों की नई यूनिफॉर्म को डिजायन किया जा चुका है। इस पोशाक को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी यानी NIFT ने डिजाइन किया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी अब तक सामने नहीं आई है।

संसद भवन के कर्मचारियों को मिल रही नई पोशाक को लेकर अब कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने विवाद खड़ा कर दिया है। संसद के कर्मचारियों की नई वर्दी पर कमल के फूल छपे होने से संबंधित खबरों को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसद को एकपक्षीय मंच बना रही है। लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक टैगोर ने यह सवाल भी किया कि राष्ट्रीय पशु और राष्ट्रीय पक्षी क्रमश: बाघ एवं मोर के बजाय सिर्फ ‘कमल’ को ही क्यों दर्शाया जा रहा है?

उन्होंने साोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सिर्फ कमल ही क्यों? मोर क्यों नहीं या बाघ क्यों नहीं? यह भाजपा पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं हैं। ओम बिरला जी, यह गिरावट क्यों?’’ खबरों में कहा गया है कि संसद के कर्मचारियों के लिए नई वर्दी होगी, जिस पर कमल के फूल अंकित होंगे। टैगोर ने कहा, ‘‘संसद के कर्मचारियों की वर्दी पर भाजपा का चुनाव चिह्न है…उन्होंने जी20 में भी ऐसा किया था। अब ये लोग फिर से ऐसा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह राष्ट्रीय फूल है।’’ उन्होंने कहा कि इस तरह का ‘ओछापन’ ठीक नहीं है और आशा है कि भाजपा इन सबसे ऊपर उठेगी और संसद को एकपक्षीय मंच नहीं बनाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है। संसद सभी पार्टियों से ऊपर है। इससे पता चलता है कि भाजपा हर दूसरी संस्था में हस्तक्षेप कर रही है।

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दिल्ली/NCR

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