अयोध्या में लाखों दीये जले, आसमान में ड्रोन शो हुआ, घाट रोशनी से जगमगाए और भव्य दीपोत्सव की तस्वीरें देशभर में छा गईं।लेकिन उत्सव की रोशनी ढलने के बाद सरयू के घाटों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। जहां एक तरफ दीपोत्सव की भव्यता की चर्चा हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग जमीन पर पड़े जले हुए मिट्टी के दीयों से बूंद-बूंद तेल इकट्ठा करते नजर आए। इन लोगों की नजरें उन दीयों में बची तेल की आखिरी बूंदों पर थीं।
एक तरफ उत्सव की चकाचौंध और दूसरी तरफ रोजमर्रा की जरूरतों से जूझती जिंदगी। यह तस्वीर सिर्फ अयोध्या की नहीं, बल्कि उन लोगों की तरफ भी हमारा ध्यान खींचती है, जो बड़े आयोजनों की चमक से दूर अपनी जरूरतों के लिए संघर्ष करते हैं।
सवाल है—क्या उत्सव की सफलता को सिर्फ उसकी भव्यता से मापा जाना चाहिए, या उन चेहरों को भी देखना चाहिए जो उसी आयोजन के बाद ऐसी तस्वीर का हिस्सा बनते हैं?






















