बिहार से Howrah-Chennai रूट तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेल और सड़क क्षेत्र की पांच बड़ी परियोजनाओं के लिए करीब 13,041 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है. इनमें 9,450 करोड़ रुपए की चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं और बिहार में 3,590.73 करोड़ रुपए की Muzaffarpur-Sitamarhi-Sonbarsa फोरलेन सड़क परियोजना शामिल है.
सार
- चार रेलवे और एक हाईवे परियोजना पर कुल करीब 13,041 करोड़ रुपए खर्च होंगे.
- रेलवे की चार परियोजनाओं से West Bengal, Odisha, Tamil Nadu और Andhra Pradesh में करीब 410 किलोमीटर नेटवर्क क्षमता बढ़ेगी.
- बिहार में Muzaffarpur-Sitamarhi-Sonbarsa NH-22 के 82.6 किलोमीटर हिस्से को फोरलेन बनाया जाएगा.
देश के रेल और सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज मंजूर किया है. बुधवार, 19 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली Cabinet Committee on Economic Affairs यानी CCEA ने चार रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं और बिहार की एक हाईवे परियोजना को मंजूरी दी. इन पांच परियोजनाओं पर करीब 13,041 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.
इसमें रेलवे परियोजनाओं की कुल लागत करीब 9,450 करोड़ रुपए है. इनका मकसद व्यस्त रेल मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैक तैयार कर ट्रेनों के संचालन में सुधार करना और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाना है. रेलवे की परियोजनाएं West Bengal, Odisha, Tamil Nadu और Andhra Pradesh के आठ जिलों से जुड़ी हैं और इनसे भारतीय रेलवे नेटवर्क की क्षमता करीब 410 किलोमीटर बढ़ेगी.
Kharagpur-Bhadrak रूट पर बनेगी चौथी लाइन
सरकार ने Kharagpur-Bhadrak सेक्शन में चौथी रेलवे लाइन को मंजूरी दी है. इस परियोजना पर करीब 3,352 करोड़ रुपए खर्च होंगे. यह सेक्शन Howrah-Chennai मुख्य रेल मार्ग का हिस्सा है और यात्री ट्रेनों के साथ माल ढुलाई के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है.
इस कॉरिडोर में पहले से क्षमता बढ़ाने का काम चल रहा है. अतिरिक्त ट्रैक बनने से व्यस्त रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संभालने और भीड़ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
Bhadrak-Haridaspur के लिए 1,583 करोड़ रुपए
दूसरी परियोजना Bhadrak-Haridaspur सेक्शन में चौथी लाइन बनाने से जुड़ी है. इस पर करीब 1,583 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. सरकार का फोकस पूर्वी तट के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता को बढ़ाने पर है.
Howrah-Chennai मुख्य लाइन से जुड़े इन रेल प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद यात्री और मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी. चारों नई रेल परियोजनाओं से कुल मिलाकर करीब 13 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ने का अनुमान है.
Gummidipoondi-Gudur में तीसरी और चौथी लाइन
दक्षिण भारत में Gummidipoondi-Gudur सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बनाने को भी मंजूरी मिली है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 2,229 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है.
Gummidipoondi-Gudur रेल सेक्शन करीब 90 किलोमीटर लंबा है और इसे हाल ही में Special Railway Project का दर्जा भी दिया गया था, जिससे जमीन अधिग्रहण और प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन को तेज करने में मदद मिल सकती है.
Cuttack-Paradeep रेल रूट की भी बढ़ेगी क्षमता
Odisha में Cuttack-Paradeep सेक्शन पर तीसरी और चौथी लाइन के लिए करीब 2,286 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी गई है. Paradeep देश के महत्वपूर्ण पोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है. रेल क्षमता बढ़ने से पोर्ट तक माल की आवाजाही और औद्योगिक सप्लाई चेन को फायदा मिलने की उम्मीद है. चारों रेल परियोजनाओं की कुल मंजूर लागत करीब 9,450 करोड़ रुपए है.
बिहार में 82.6 KM हाईवे होगा फोरलेन
रेलवे के साथ बिहार को भी बड़ी सड़क परियोजना मिली है. केंद्र सरकार ने Muzaffarpur-Sitamarhi-Sonbarsa सेक्शन के NH-22 को फोरलेन बनाने की मंजूरी दी है. करीब 82.6 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की कुल पूंजीगत लागत 3,590.73 करोड़ रुपए है. इसे Hybrid Annuity Mode यानी HAM पर विकसित किया जाएगा.
इस सड़क से Muzaffarpur, Sitamarhi और Sonbarsa के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ नेपाल सीमा की ओर सड़क संपर्क को भी मजबूती मिलेगी. इससे उत्तर बिहार में यात्रियों और माल की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है.
क्यों अहम है 13,041 करोड़ रुपए का इंफ्रा निवेश?
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य व्यस्त ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना है. रेलवे में अतिरिक्त लाइनों से ट्रेन संचालन में दबाव कम हो सकता है और माल ढुलाई के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी. वहीं बिहार की फोरलेन सड़क उत्तर बिहार और नेपाल सीमा के बीच बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगी. सरकार इन परियोजनाओं को PM Gati Shakti के तहत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षमता मजबूत करने की व्यापक रणनीति से जोड़कर देख रही है.
कुल मिलाकर केंद्र की ताजा मंजूरी का बड़ा हिस्सा देश के पूर्वी तट के रेल नेटवर्क पर केंद्रित है. Howrah-Chennai कॉरिडोर से लेकर Paradeep और बिहार-नेपाल सीमा तक, इन परियोजनाओं का असर आने वाले वर्षों में यात्री कनेक्टिविटी, माल ढुलाई और औद्योगिक गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है.
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