- बाईं करवट सोना: रात में एसिड रिफ्लक्स और हार्टबर्न के लक्षण कम करने में मदद कर सकता है।
- खाने के तुरंत बाद न लेटें: सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले भोजन कर लेना बेहतर है।
- भारी और मसालेदार भोजन से बचें: खासकर रात के समय ज्यादा तेल-मसाले वाला खाना हार्टबर्न बढ़ा सकता है।
- लगातार समस्या हो तो डॉक्टर से मिलें: बार-बार एसिड रिफ्लक्स को केवल सोने की पोजीशन बदलकर नजरअंदाज न करें।
Health Tips: अच्छी नींद सिर्फ शरीर को आराम देने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि सोने की सही पोजीशन भी आपकी सेहत पर असर डाल सकती है। खासकर एसिडिटी, हार्टबर्न, खट्टी डकार और पाचन संबंधी परेशानी से जूझने वाले लोगों के लिए रात में किस करवट सोना है, यह महत्वपूर्ण हो सकता है।
कई लोगों को रात में खाना खाने के बाद सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन या पेट में भारीपन महसूस होता है। इसकी वजह केवल मसालेदार या ज्यादा खाना ही नहीं, बल्कि खाना खाने के तुरंत बाद लेटना और सोने की गलत पोजीशन भी हो सकती है।
क्या सोने की पोजीशन से बढ़ सकती है हार्टबर्न की समस्या?
खाना खाने के तुरंत बाद पीठ के बल बिल्कुल सपाट लेटने से पेट का एसिड भोजन नली की ओर वापस आने की संभावना बढ़ सकती है। इसे एसिड रिफ्लक्स कहा जाता है। इसकी वजह से सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) की समस्या है, उनमें रात के समय लेटने पर ये लक्षण ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
वहीं पेट के बल सोने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कुछ लोगों में पाचन संबंधी असहजता बढ़ सकती है। इसलिए रात में भारी भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाना अच्छी आदत नहीं मानी जाती।
पाचन और हार्टबर्न के लिए कौन-सी करवट बेहतर?
एसिड रिफ्लक्स और रात में होने वाली हार्टबर्न की समस्या के लिए बाईं करवट सोना कई लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। बाईं तरफ करवट लेकर सोने पर शरीर की स्थिति और गुरुत्वाकर्षण पेट के एसिड को भोजन नली की ओर वापस जाने से रोकने में मदद कर सकते हैं। इससे रात में एसिड रिफ्लक्स के लक्षण और सीने की जलन कम हो सकती है। हालांकि हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य अलग होता है। इसलिए किसी एक पोजीशन को सभी के लिए एक जैसा प्रभावी नहीं माना जा सकता।
सिर और कंधों को थोड़ा ऊंचा रखना भी हो सकता है मददगार
रात में बार-बार हार्टबर्न की समस्या होने पर कुछ लोगों को सिर और ऊपरी शरीर को थोड़ा ऊंचा रखकर सोने से राहत मिल सकती है। इससे पेट के एसिड के ऊपर की ओर आने की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है। सिर्फ सिर के नीचे बहुत ऊंचा तकिया लगाने के बजाय ऊपरी शरीर को हल्का ऊंचा रखने की व्यवस्था ज्यादा आरामदायक हो सकती है।
रात में खाना कब खाना चाहिए?
हार्टबर्न और एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए सोने से ठीक पहले खाना खाने से बचना चाहिए। सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले रात का खाना खत्म कर लेना एक उपयोगी आदत हो सकती है। इससे शरीर को भोजन पचाने के लिए समय मिलता है और खाने के तुरंत बाद लेटने से होने वाली परेशानी कम हो सकती है।
किन चीजों से बढ़ सकती है एसिडिटी?
अगर आपको बार-बार हार्टबर्न या एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है, तो रात में इन चीजों का सेवन सीमित करना फायदेमंद हो सकता है:
- बहुत ज्यादा मसालेदार खाना
- तला-भुना और अधिक तेल वाला भोजन
- बहुत ज्यादा खाना
- कैफीन वाले पेय
- शराब
- धूम्रपान
हालांकि ट्रिगर फूड हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। इसलिए यह ध्यान देना भी जरूरी है कि कौन-से खाद्य पदार्थ खाने के बाद आपके लक्षण बढ़ते हैं।
वजन का भी पड़ सकता है असर
अधिक वजन या मोटापा पेट पर दबाव बढ़ा सकता है, जिससे कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स और हार्टबर्न की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना मददगार हो सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कभी-कभार हार्टबर्न होता है तो खान-पान और सोने की आदतों में बदलाव से राहत मिल सकती है। लेकिन अगर एसिड रिफ्लक्स बार-बार होता है, रात में नींद खराब करता है या लगातार बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि लगातार होने वाला रिफ्लक्स किसी अन्य पाचन संबंधी समस्या का संकेत भी हो सकता है।

