
हैदर अली, रोहतास ब्यूरो संचार टाइम्स

सासाराम के सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब ब्लड लेने आए मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि ब्लड बैंक प्रशासन द्वारा जानबूझकर रक्त नहीं दिया जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा।
क्या है मामला?
एक मरीज के परिजन ने आरोप लगाया कि दो यूनिट ब्लड दान करने के बावजूद उन्हें केवल एक यूनिट ब्लड ही दिया गया, और वह भी कई घंटों की मशक्कत के बाद। परिजनों का कहना था कि यह पहली बार नहीं हुआ, बल्कि ऐसा बार-बार हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लड डोनेट करने के बावजूद ब्लड देने में टालमटोल की जा रही है, और कई बार लोगों को एक यूनिट ब्लड के लिए चार-चार दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
“बी पॉजिटिव” ब्लड ग्रुप को लेकर बवाल
मामला उस वक्त और गर्मा गया जब एक मरीज के लिए “बी पॉजिटिव” ब्लड नहीं होने की बात कहकर एक युवक से ब्लड डोनेट करवाया गया, लेकिन फिर भी उसे समय पर ब्लड नहीं दिया गया। लोगों का कहना था कि ऐसा करना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि मरीज की जान को भी जोखिम में डालता है।
ब्लड बैंक प्रशासन ने दी सफाई
विवाद बढ़ने पर ब्लड बैंक के इंचार्ज ने सफाई देते हुए कहा कि डोनेट किए गए रक्त की जांच प्रक्रिया पूरी किए बिना उसे किसी मरीज को नहीं दिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि ब्लड को सुरक्षित बनाने के लिए एलाइजा टेस्ट (ELISA Test) किया जाता है, जिसमें कम से कम चार घंटे का समय लगता है। लेकिन लोग डोनेट करते ही तत्काल ब्लड की मांग करने लगते हैं, जो तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
पुलिस की दखल के बाद मामला शांत
स्थिति बिगड़ती देख ब्लड बैंक प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। अंततः मरीज को ब्लड उपलब्ध कराया गया।
ब्लैक मार्केटिंग के भी आरोप
इस हंगामे के बीच कुछ लोगों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि ब्लड बैंक में 8,000 रुपए प्रति यूनिट की दर से ब्लड की अवैध बिक्री भी हो रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि एक यूनिट ब्लड लेने के लिए दो यूनिट ब्लड दान करना पड़ता है, जो कि पूरी तरह गलत है।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग?
स्थानीय लोगों की मांग है कि ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यह भी मांग की गई कि ब्लड की उपलब्धता और वितरण में पारदर्शिता लाई जाए।
