मानसून सत्र खत्म होते ही बढ़ी सियासी तल्खी, ओम बिरला की चाय पार्टी से INDIA गठबंधन ने बनाई दूरी
ST.News Desk
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बने रहे गतिरोध की तस्वीर सत्र समाप्त होने के बाद भी दिखाई दी। लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन से जुड़े कई विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया। विपक्षी दलों की नाराजगी के पीछे मानसून सत्र में कम कामकाज, प्रश्नकाल नहीं चलना और कई विधेयकों के बिना पर्याप्त बहस पारित होने जैसे मुद्दों को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
हालांकि संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का रुख एक जैसा नहीं दिखाई दिया। जहां लोकसभा में INDIA गठबंधन के कई दलों ने स्पीकर की चाय पार्टी से दूरी बनाई, वहीं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेता चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा आयोजित चाय पार्टी में शामिल हुए।
लोकसभा में कांग्रेस, TMC और SP का बहिष्कार
लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद गुरुवार को स्पीकर ओम बिरला ने अपने चैंबर में पारंपरिक चाय पार्टी का आयोजन किया। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत सरकार के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन की कई अन्य पार्टियों के नेताओं ने इस आयोजन में हिस्सा नहीं लिया। बताया गया कि विपक्ष ने संसद के मानसून सत्र के दौरान कार्यवाही के तरीके और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं होने को लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए बहिष्कार का फैसला किया।
हालांकि, DMK की नेता कनिमोझी के इस पारंपरिक मिलन समारोह में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इससे INDIA गठबंधन के भीतर भी लोकसभा की चाय पार्टी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक रुख देखने को मिला।
राज्यसभा में दिखी अलग तस्वीर, खड़गे और सोनिया गांधी हुए शामिल
लोकसभा के उलट राज्यसभा में माहौल अलग दिखाई दिया। राज्यसभा के चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा आयोजित चाय पार्टी में विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे तथा सोनिया गांधी भी इस बैठक में मौजूद रहे।
इस घटनाक्रम ने संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की अलग-अलग राजनीतिक रणनीति को भी उजागर किया। एक ओर लोकसभा में विपक्ष ने बहिष्कार के जरिए सरकार और संसदीय कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध दर्ज कराया, जबकि दूसरी ओर राज्यसभा में विपक्षी नेताओं ने पारंपरिक चाय पार्टी में भाग लिया।
13 अगस्त को खत्म हुआ मानसून सत्र, कामकाज को लेकर उठा सवाल
गुरुवार, 13 अगस्त, को लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया। यह सत्र लगातार हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के टकराव के कारण चर्चा में रहा।
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सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं हो सका, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पर्याप्त बहस के बिना पारित किया गया। विपक्षी दलों ने इसे लेकर बार-बार सदन में विरोध किया और सरकार पर महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों से बचने का आरोप लगाया।
NEET पेपर ‘लीक’ से राम मंदिर चंदे तक कई मुद्दों पर हंगामा
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। इनमें NEET पेपर ‘लीक’, राम मंदिर चंदे की कथित ‘चोरी’ और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दे शामिल रहे।
विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर भी विरोध दर्ज कराया। इन मुद्दों पर लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और सदन का कामकाज प्रभावित हुआ।
आखिरी दिन लोकसभा में वंदे मातरम् के बाद कार्यवाही स्थगित
मानसून सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से हुई। इसके कुछ ही देर बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद थे।
वहीं, राज्यसभा में अंतिम दिन कामकाज हुआ और चर्चा के बाद ‘माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ को पारित किया गया।
राज्यसभा में 37 घंटे 49 मिनट चला कामकाज
उच्च सदन की कार्यवाही इस मानसून सत्र में कुल 37 घंटे 49 मिनट तक चली। इस दौरान 12 विधेयकों पर पारित करने या वापस भेजने के लिए विचार किया गया। सत्र समाप्त होने से पहले चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने लगातार हंगामे और बाधित कार्यवाही पर अफसोस जताया।
राज्यसभा की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ भी बजाया गया। इसके साथ ही मानसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया।
क्या है इस बहिष्कार का राजनीतिक संदेश?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार केवल एक कार्यक्रम से दूरी नहीं, बल्कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की नाराजगी का राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। विपक्ष ने कम कामकाज, प्रश्नकाल नहीं होने और विधेयकों पर चर्चा के मुद्दे को उठाकर सरकार और संसदीय कार्यप्रणाली के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
अब सवाल यह है कि संसद के अगले सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की स्थिति सुधरेगी या फिर मानसून सत्र की तरह गतिरोध और टकराव जारी रहेगा। फिलहाल, ओम बिरला की चाय पार्टी के बहिष्कार ने संसद के भीतर मौजूद राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर खुलकर सामने ला दिया है।

