प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख
कोलकाता: उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना में 19 लोगों की मौत और करीब 25 लोगों के घायल होने की खबर है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अचानक बारिश शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने पंडाल में प्रवेश करने की कोशिश की। इसी दौरान निकास द्वार के पास भीड़ का दबाव बढ़ने से अफरा-तफरी मच गई।
घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। हादसे के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
कैसे मची चोरबागान दुर्गा पंडाल में भगदड़?
शुरुआती जानकारी के अनुसार, दुर्गा पूजा पंडाल में सब कुछ सामान्य चल रहा था। इसी बीच बारिश शुरू होने पर बड़ी संख्या में लोग बारिश से बचने के लिए अंदर जाने लगे। प्रवेश और निकास के रास्तों पर भीड़ बढ़ने से स्थिति बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि निकास द्वार के पास लोगों की आवाजाही बाधित होने के कारण भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई।
मौके पर मौजूद अधिकारियों से मिली शुरुआती जानकारी में निजी सुरक्षा कर्मियों की ओर से सीटी बजाने और लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि वीआईपी पास धारकों को प्रवेश देने संबंधी घोषणा के बाद भीड़ में धक्का-मुक्की बढ़ी। हालांकि, इन परिस्थितियों और हादसे के बीच वास्तविक संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
संकरा रास्ता और भीड़ प्रबंधन भी जांच के दायरे में
पंडाल में प्रवेश के रास्ते के कुछ हिस्सों के संकरे होने की जानकारी भी सामने आई है। भीड़ बढ़ने के दौरान ऐसे रास्तों पर लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
जांच में प्रवेश और निकास द्वारों की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, निजी सुरक्षा एजेंसी की भूमिका और आयोजन के दौरान जारी घोषणाओं समेत विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। हादसे के बाद संबंधित निकास द्वार पर बैरिकेडिंग किए जाने और उसे बंद रखे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे, जहां हादसे में घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है। शुरुआती रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने आयोजन के दौरान लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा को घटना से जुड़ा संभावित कारण बताया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, दुर्गा पूजा आयोजित करने वाले क्लब के पदाधिकारियों, निजी सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। मृतकों के कुछ परिजनों ने भी सुरक्षा कर्मियों की सीटी बजने के बाद भीड़ में अचानक धक्का-मुक्की शुरू होने की बात कही है। इन बयानों और घटना के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
अन्य दुर्गा पूजा पंडालों के लिए भी सतर्कता
घटना के बाद प्रशासन ने भीड़भाड़ वाले कई दुर्गा पूजा आयोजनों को एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से पंडाल बंद करने की सलाह दी है। कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में पंडाल लगाए जाते हैं, जिनमें दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
यह हादसा बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित प्रवेश-निकास और आपातकालीन व्यवस्था की अहमियत को सामने लाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता की घटना पर दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य नेताओं ने भी इस त्रासदी पर शोक व्यक्त किया।
आगे क्या होगा?
जांच के दौरान भीड़ बढ़ने की परिस्थितियों, पंडाल की प्रवेश-निकास व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की भूमिका और आयोजकों की जिम्मेदारी की पड़ताल की जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर हादसे के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों का पता चल सकेगा।
मृतकों और घायलों की संख्या, मुआवजे तथा हिरासत से जुड़ी जानकारी को प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक अपडेट से सत्यापित करें।






















