सेक्टर-59 में बस की टक्कर से साइकिल सवार घायल; मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस के रिस्पांस टाइम के साथ-साथ घायल को संभालने की व्यवस्था पर भी उठाए गंभीर सवाल
हाईटेक नोएडा में सड़क हादसे के बाद 112 की क्विक रिस्पांस व्यवस्था और मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस की तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। सेक्टर-59 में एक बस की टक्कर से साइकिल सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद घायल सड़क पर पड़ा रहा, जबकि मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, हादसे की सूचना देने के लिए 112 और 100 नंबर पर कई बार फोन किया गया, लेकिन पुलिस को मौके तक पहुंचने में काफी समय लगा। लोगों का कहना है कि पुलिस की टीम करीब 20 से 25 मिनट बाद मौके पर पहुंची। हालांकि, इस समयावधि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
घायल को संभालने में भी सामने आया सवाल
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पुलिस टीम के पहुंचने के बाद भी शुरुआती कुछ मिनटों में यह स्पष्ट नहीं था कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल किस तरह संभाला जाए और उसे सुरक्षित स्थिति में कैसे रखा जाए।
लोगों के मुताबिक, पुलिस के मौके पर पहुंचने के करीब 4-5 मिनट बाद एंबुलेंस भी पहुंची। ऐसे में सवाल सिर्फ पुलिस के देर से पहुंचने का नहीं, बल्कि हादसे के बाद शुरुआती मेडिकल रिस्पांस की व्यवस्था का भी है।
क्या 112 की सूचना के साथ ही एंबुलेंस को अलर्ट किया जाता है?
गंभीर सड़क हादसों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में मौके पर मौजूद लोगों ने सवाल उठाया कि क्या 112 पर किसी गंभीर सड़क हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस के साथ-साथ एंबुलेंस सेवा को भी तत्काल सक्रिय नहीं किया जाना चाहिए?
अगर घटनास्थल पर घायल की स्थिति गंभीर हो, तो प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ के साथ एंबुलेंस पहुंचने से घायल को शुरुआती चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। यह व्यवस्था पुलिस की भूमिका को बदलने के बजाय पुलिस और मेडिकल इमरजेंसी रिस्पांस के बीच बेहतर तालमेल का सवाल उठाती है।
पुलिस की ट्रेनिंग और ग्राउंड रिस्पांस पर भी सवाल
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि पुलिस टीम के पहुंचने के बाद भी कुछ समय तक यह स्पष्ट नहीं दिखा कि घायल को किस तरह संभाला जाए। इसी वजह से लोगों ने सवाल उठाया कि क्या हर आपात स्थिति के लिए पुलिसकर्मियों को बेसिक फर्स्ट-एड और गंभीर घायल को सुरक्षित तरीके से संभालने की पर्याप्त ट्रेनिंग दी जाती है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस अक्सर एंबुलेंस पहुंचने से पहले घटनास्थल पर पहुंचती है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को बेसिक फर्स्ट-एड, घायल की स्थिति को और खराब होने से बचाने तथा तत्काल मेडिकल सहायता से जोड़ने की स्पष्ट प्रक्रिया की जानकारी होना महत्वपूर्ण हो सकता है।
घायल सड़क पर और लोग बनाते रहे वीडियो
हादसे के बाद मौके पर भीड़ जुट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोग घायल की मदद करने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाते रहे। ऐसे हालात में पुलिस और प्रशासन के लिए भीड़ को नियंत्रित कर घायल तक सुरक्षित तरीके से पहुंच बनाना और तत्काल मेडिकल सहायता सुनिश्चित करना अहम हो जाता है।
बस टक्कर मारकर मौके से निकली
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, साइकिल सवार को टक्कर मारने के बाद बस वहां से निकल गई। अब पुलिस के सामने बस और उसके चालक की पहचान कर कार्रवाई करने की चुनौती है।
चार बड़े सवाल
- 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंचने में कितना समय लगा?
- क्या गंभीर सड़क हादसे की सूचना मिलते ही एंबुलेंस को भी समानांतर रूप से अलर्ट किया गया?
- क्या मौके पर पहुंची पुलिस टीम के पास घायल को शुरुआती मदद देने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन थे?
- क्या 112 रिस्पांस सिस्टम में पुलिस और मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं के बीच और बेहतर समन्वय की जरूरत है?
सवाल सिर्फ देरी का नहीं, पूरी व्यवस्था का है
इस घटना ने एक अहम सवाल सामने रखा है-सड़क हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस, एंबुलेंस और मेडिकल टीम के बीच रिस्पांस सिस्टम कितना तेज और समन्वित है? मौके पर मौजूद लोगों के दावों की आधिकारिक पुष्टि और पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। लेकिन यह घटना इतना जरूर पूछती है कि आपात स्थिति में फोन उठने से लेकर घायल को अस्पताल पहुंचाने तक हर मिनट के लिए जिम्मेदार व्यवस्था कितनी तैयार है?
यह भी पढ़ें : बैंक हड़ताल में SBI ग्राहकों को राहत

