
गंगा की लहरों पर सवार हुई यादगार शादी
ST.News Desk : लगातार हो रही भारी बारिश ने उत्तर भारत में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। जहां पहाड़ों में बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं मैदानी इलाकों में नदियां उफान पर हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक अनोखी और भावनात्मक घटना सामने आई है, जिसने बाढ़ के बीच भी ज़िंदगी के जश्न को जीवित रखा।

नाव पर चढ़कर पहुंची बारात
बिहार के बक्सर जिले के नैनीजोर लाल डेरा गांव के रहने वाले कमलेश राम के बेटे राजेश कुमार की शादी बलिया जिले के बेयासी गांव में तय थी। लेकिन गंगा नदी की बाढ़ ने सारे रास्ते बंद कर दिए। शादी टालना विकल्प नहीं था, ऐसे में परिवार ने नाव से बारात ले जाने का फैसला किया। गंगौली गांव के पास तटबंध से नीचे सजी-धजी नाव पर 25 बाराती दो नावों में सवार होकर गंगा नदी पार करते हुए बलिया पहुंचे। बिना डीजे और बैंड-बाजे के, गंगा की लहरों और तालियों की थाप पर झूमते बाराती इस शादी को खास बना गए। दूल्हा राजेश कुमार पारंपरिक परिधान में सजे-संवरे नाव पर बैठे रहे और बारात उत्साहपूर्वक अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रही।
सोशल मीडिया पर वायरल
यह अनोखा दृश्य ग्रामीणों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों से फोटो और वीडियो बनाए, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। कमलेश राम ने कहा, “शादी की तारीख पहले से तय थी, इसलिए बाढ़ के बावजूद गंगा मैया की लहरों के सहारे यह यादगार बारात निकाली गई।”
दूसरी तरफ बिहार में हालात भयावह : जहां एक ओर यह घटना आशा और परंपरा की मिसाल बनी, वहीं दूसरी ओर बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति विकराल हो चुकी है। मुज़फ्फरपुर और सारण जिलों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
बागमती नदी औराई ब्लॉक में तीन फीट से ज्यादा बढ़ चुकी है। बभनगामा पूर्वी टोला में चचरी पुल बह गया, जो कई गांवों की एकमात्र जीवनरेखा था। गांवों का संपर्क टूट गया, हज़ारों लोग फंसे हुए हैं और आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। जहां एक तरफ प्राकृतिक आपदा लोगों की ज़िंदगी को संकट में डाल रही है, वहीं दूसरी तरफ हौसला, परंपरा और प्रेम की कहानियां भी जन्म ले रही हैं। बक्सर से बलिया तक नाव पर सजी यह बारात सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि मानव जिजीविषा और जज़्बे की मिसाल बन गई है।
