- उत्तर प्रदेश में गलत ई-चालान के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू हो गई है।
- वाहन मालिक को चालान जारी होने के 45 दिन के भीतर शिकायत करनी होगी। अधिकारी को 30 दिन में फैसला देना होगा।
- निर्धारित अवधि तक जुर्माना नहीं चुकाने पर वाहन ट्रांसफर, फिटनेस और रिन्यूअल जैसी सेवाएं रोकी जा सकती हैं।
उत्तर प्रदेश में वाहन मालिकों को गलत ट्रैफिक चालान से राहत दिलाने के लिए परिवहन विभाग ने नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू की है। अब घर पर खड़े वाहन का दूसरी जगह चालान कटने, दोपहिया वाहन के नंबर पर चार पहिया वाहन का चालान आने या बिना नियम तोड़े जुर्माना लगाए जाने जैसे मामलों में आरटीओ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
वाहन मालिक चालान जारी होने के 45 दिन के भीतर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर उसे चुनौती दे सकेंगे। इसके लिए नेक्स्ट जेन ई-चालान ऐप और संबंधित पोर्टल में नया फीचर जोड़ा गया है। शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में शिकायत निवारण अधिकारी भी तैनात किए गए हैं।
45 दिन के भीतर दर्ज करनी होगी आपत्ति
नए नियमों के अनुसार, किसी वाहन का ई-चालान जारी होने के बाद मालिक के पास उसे जांचने और आपत्ति दर्ज करने के लिए 45 दिन का समय रहेगा। यदि वाहन मालिक को लगता है कि चालान गलत नंबर, तकनीकी गड़बड़ी, वाहन की गलत पहचान या किसी अन्य कारण से जारी हुआ है, तो वह ऑनलाइन माध्यम से शिकायत कर सकता है।
शिकायत के साथ वाहन मालिक को अपने दावे से संबंधित दस्तावेज या दूसरे सबूत भी देने होंगे। इनमें वाहन की फोटो, लोकेशन से जुड़ी जानकारी, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या चालान में दर्ज वाहन से अलग होने का प्रमाण शामिल हो सकता है। इससे अधिकारी के लिए मामले की जांच करना आसान होगा।
30 दिन में देना होगा शिकायत पर फैसला
ऑनलाइन आपत्ति मिलने के बाद शिकायत निवारण अधिकारी को 30 दिन के भीतर मामले का निस्तारण करना होगा। जांच में वाहन मालिक का दावा सही मिलने पर गलत चालान रद्द किया जा सकेगा। शिकायत खारिज होने की स्थिति में अधिकारी को फैसले का कारण दर्ज करना होगा।
यदि शिकायत पर निर्धारित 30 दिन के भीतर कोई फैसला नहीं होता है, तो चालान स्वतः समाप्त होने का प्रावधान बताया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों को लंबे समय तक लंबित रहने से रोकना और वाहन मालिकों को समय पर समाधान उपलब्ध कराना है।
शिकायत नहीं की तो 75 दिन में भुगतान
यदि वाहन मालिक को चालान पर कोई आपत्ति नहीं है या वह 45 दिन के भीतर उसे चुनौती नहीं देता है, तो चालान स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद भुगतान के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा। इस तरह चालान जारी होने की तारीख से कुल 75 दिन के भीतर जुर्माने की रकम जमा करनी होगी।
समय पर न तो शिकायत करने और न ही भुगतान करने पर चालान लंबित माना जाएगा। भुगतान की प्रक्रिया केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल के माध्यम से पूरी करनी चाहिए। किसी अनजान लिंक, निजी खाते, क्यूआर कोड या संदिग्ध मैसेज के जरिए चालान का भुगतान करने से बचना जरूरी है।
फैसला खिलाफ आने पर कोर्ट जाने का विकल्प
शिकायत निवारण अधिकारी का निर्णय वाहन मालिक के खिलाफ आने पर भी आगे अपील का रास्ता खुला रहेगा। वाहन मालिक चालान की 50 प्रतिशत राशि जमा करके संबंधित न्यायालय में फैसले को चुनौती दे सकता है।
यदि वाहन मालिक न तो अधिकारी का निर्णय स्वीकार कर भुगतान करता है और न ही अदालत में अपील करता है, तो उसे अतिरिक्त समय देने के बाद कार्रवाई शुरू की जा सकती है। पूरी प्रक्रिया में चालान जारी होने से लगभग चार महीने तक भुगतान या कानूनी चुनौती का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
वाहन से जुड़े काम हो सकते हैं ब्लॉक
तय समय बीतने के बाद भी चालान का भुगतान नहीं करने पर वाहन को सरकारी पोर्टल पर “नॉट टू बी ट्रांजैक्टेड” श्रेणी में डाला जा सकता है। इसके बाद वाहन से जुड़ी कई जरूरी सेवाएं रोक दी जाएंगी।
ऐसी स्थिति में वाहन का ट्रांसफर, रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल, फिटनेस सर्टिफिकेट, एनओसी और अन्य परिवहन सेवाओं से संबंधित आवेदन आगे नहीं बढ़ पाएंगे। लंबित चालान की रकम चुकाने या मामले का निस्तारण होने के बाद ही सेवाएं दोबारा शुरू की जा सकेंगी।
शिकायत निवारण अधिकारी किए गए तैनात
परिवहन विभाग ने चालानों से जुड़ी आपत्तियों की जांच के लिए शिकायत निवारण अधिकारी यानी जीआरओ तैनात किए हैं। ये अधिकारी ऑनलाइन आवेदन, उपलब्ध प्रमाण और चालान से संबंधित रिकॉर्ड का अध्ययन करके फैसला देंगे।
नई व्यवस्था से गलत चालान के मामलों में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, वाहन मालिकों को शिकायत लेकर बार-बार आरटीओ कार्यालय जाने से भी राहत मिलेगी। विभाग को उम्मीद है कि निर्धारित समय-सीमा लागू होने से सही चालानों की वसूली तेज होगी और गलत चालानों का समाधान भी समय पर हो सकेगा।
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