’15 हजार देते हैं, 25 बताते हैं और 250 बढ़ाते हैं…’,
कर्मचारियों ने खोली नोएडा में कंपनियों की पोल
उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को हिंसक हो गया। कम वेतन और बढ़ती महंगाई से परेशान श्रमिक सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए
ST.News Desk
नोएडा और गौतमबुद्ध नगर जिले के विभिन्न इलाकों में मजदूरों का प्रदर्शन लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जो सोमवार को उग्र रूप ले बैठा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घर का किराया और खाने-पीने का खर्च इतना बढ़ गया है कि मौजूदा सैलरी में गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। कई मजदूरों का आरोप है कि उन्हें महीने में केवल 10 हजार रुपये तक वेतन मिलता है, जो वर्तमान महंगाई के हिसाब से काफी कम है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई। गुस्साए लोगों ने एक पुलिस वाहन को आग के हवाले कर दिया। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को तितर-बितर किया।

मजदूरों का कहना है कि वे दिहाड़ी मजदूर नहीं बल्कि संगठित क्षेत्र की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी हैं, लेकिन इसके बावजूद कंपनियां श्रम कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं। वेतन में कटौती, ओवरटाइम का भुगतान न होना और अन्य अनियमितताओं को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई।
इसी बीच, गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने श्रमिकों को राहत देते हुए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। निर्देशों के अनुसार, सभी कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों को हर महीने की 10 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य होगा। ओवरटाइम के लिए दोगुनी दर से भुगतान किया जाएगा और किसी भी प्रकार की अवैध कटौती को दंडनीय माना जाएगा। साथ ही, कर्मचारियों को सैलरी स्लिप देना भी जरूरी किया गया है।
प्रशासन ने त्योहारों के अवसर पर बोनस देने के भी निर्देश दिए हैं, जिसका भुगतान 30 नवंबर तक सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में करना होगा। मजदूरों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। जिलाधिकारी ने श्रमिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।

