ST.News Desk
ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 (NEP 2026) के तहत भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में पावर डिस्ट्रीब्यूशन पर एक महत्वपूर्ण CEO राउंडटेबल का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र को मजबूत बनाना और डिस्कॉम्स (DISCOMs) की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सुधारों पर चर्चा करना था।
बैठक की अध्यक्षता Pankaj Agarwal, सचिव, ऊर्जा मंत्रालय ने की। इसमें देश की प्रमुख बिजली कंपनियों के CEO और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने ड्राफ्ट NEP 2026 का स्वागत करते हुए इसे व्यापक और भविष्य उन्मुख नीति बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के अनुरूप पावर सेक्टर को मजबूत करने के लिए स्पष्ट रणनीतिक दिशा प्रदान करती है।
चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि बिजली आपूर्ति को Viksit Bharat @ 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए, जिसमें 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य शामिल है। ड्राफ्ट NEP 2026 के तहत प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2030 तक 2000 kWh और 2047 तक 4000 kWh से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं—2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी और 2070 तक नेट-जीरो—के अनुरूप है।
नीति में क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए व्यापक ढांचा प्रस्तुत किया गया है, जिसमें प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, ग्रिड की मजबूती बढ़ाना और नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग को सक्षम बनाना शामिल है। साथ ही, उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए डिमांड-साइड मैनेजमेंट पर भी जोर दिया गया है।
NEP 2026 का एक प्रमुख फोकस वितरण क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है। इसके लिए अग्रिम योजना के जरिए बिजली खरीद का अनुकूलन, AT&C (एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल) हानियों में कमी और कॉरपोरेट गवर्नेंस को सुदृढ़ करने जैसे उपाय सुझाए गए हैं। नीति के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को चरणबद्ध तरीके से लागू कर AT&C हानियों को सिंगल डिजिट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए साझा वितरण नेटवर्क की अवधारणा प्रस्तावित की गई है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर की दोहराव को रोका जा सके। साथ ही GIS आधारित एसेट मैपिंग, कंज्यूमर इंडेक्सिंग और सिस्टम ऑटोमेशन पर भी जोर दिया गया है।
नीति में वितरित ऊर्जा संसाधनों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम ऑपरेटर (DSO) की स्थापना का सुझाव दिया गया है, जो नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और Vehicle-to-Grid (V2G) तकनीकों के एकीकरण को बढ़ावा देगा। इससे लोकल एनर्जी मार्केट को मजबूती मिलेगी और उपभोक्ताओं की भागीदारी बढ़ेगी।
इसके अलावा, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाने के लिए नेटवर्क रिडंडेंसी, सख्त सेवा मानकों का पालन और शहरी क्षेत्रों में अंडरग्राउंड केबलिंग जैसी पहलें शामिल की गई हैं। 2032 तक 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर स्तर पर रिडंडेंसी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। सीमा क्षेत्रों में सार्वभौमिक बिजली पहुंच सुनिश्चित करना भी नीति की प्राथमिकताओं में शामिल है।
राउंडटेबल में इस बात पर सहमति जताई गई कि वितरण क्षेत्र में निरंतर सुधार बेहद जरूरी हैं, ताकि डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सके और Viksit Bharat @ 2047 के तहत भारत के आर्थिक और ऊर्जा परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।

