ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनावपूर्ण युद्ध अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक महीने से जारी संघर्ष के बावजूद कोई ठोस नतीजा न निकलने पर अमेरिका जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है, जबकि ईरान ने सख्त जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
ST.News Desk
करीब एक महीने से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद अमेरिकी प्रशासन अब बड़े जमीनी अभियान की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन ईरान में हफ्तों या महीनों तक चलने वाले सीमित जमीनी ऑपरेशन की योजना बना रहा है, जिसमें 17,000 से अधिक सैनिक तैनात किए जा सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक किसी भी सैन्य योजना को अंतिम मंजूरी नहीं दी है। व्हाइट हाउस के अनुसार, पेंटागन का काम राष्ट्रपति को अधिकतम विकल्प देना है, न कि निर्णय लेना। संभावित ऑपरेशन में स्पेशल फोर्सेज और नियमित इन्फैंट्री शामिल हो सकती है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तटीय क्षेत्रों में कार्रवाई कर सकती है।
अमेरिका के इस संभावित जमीनी ऑपरेशन का उद्देश्य तेहरान के नियंत्रण वाले रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करना और उन्हें लंबे समय तक अपने नियंत्रण में रखना बताया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने से अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा कई गुना बढ़ सकता है। इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 300 से अधिक के घायल होने की खबर है।
इधर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी संस्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी है। खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई अमेरिकी विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों और छात्रों को कैंपस से दूर रहने की चेतावनी दी गई है।
हाल के हमलों में तेहरान समेत कई स्थानों को निशाना बनाया गया। राजधानी के उत्तर-पूर्व में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर भी हमला हुआ, जिसमें इमारतों को नुकसान पहुंचा, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी सैनिक ईरानी जमीन पर उतरे, तो उनका “आग से स्वागत” किया जाएगा और क्षेत्र में मौजूद उनके सहयोगियों को भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
गालिबाफ ने कहा कि ईरान की सैन्य तैयारी पूरी है, मिसाइलें तैयार हैं और देश का संकल्प पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी जमीनी हमले की स्थिति में अमेरिका को भारी जवाब दिया जाएगा।

