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PNB विलय के 5 साल बाद बड़ा सवाल : क्या पूर्व UBI अधिकारियों के साथ हुआ न्याय? वरिष्ठता, प्रमोशन और ट्रांसफर को लेकर बढ़ रहा असंतोष

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नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंकिंग विलयों में शामिल पंजाब नेशनल बैंक (PNB), ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (UBI) के एकीकरण को पाँच वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। लेकिन बैंकिंग जगत में अब एक बड़ा सवाल तेजी से उठ रहा है—क्या पूर्व UBI अधिकारियों और कर्मचारियों को विलय के बाद वह सम्मान, अवसर और प्रतिनिधित्व मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी?

ST.News Desk

बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूर्व UBI अधिकारियों के बीच वरिष्ठता (Seniority), पदोन्नति (Promotion), स्थानांतरण (Transfer) और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर असंतोष व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि विलय के समय समान अवसर और निष्पक्ष व्यवस्था का जो भरोसा दिया गया था, वह आज भी अधूरा दिखाई देता है।

सूत्रों का दावा है कि अनेक अधिकारी वर्षों की सेवा, अनुभव और बेहतर प्रदर्शन के बावजूद अपने कैरियर में अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाए हैं। इससे कर्मचारियों के बीच यह भावना मजबूत हुई है कि उन्हें संगठन में बराबरी का अवसर नहीं मिल रहा।

सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठता और प्रमोशन के मुद्दे को लेकर हो रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि कैरियर उन्नति की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन की कमी महसूस की जा रही है, जिससे योग्य अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हुआ है।

वहीं, ट्रांसफर नीति को लेकर भी कर्मचारियों में नाराज़गी बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कई अधिकारियों को बार-बार या दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती का सामना करना पड़ा है, जिससे उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर असर पड़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों ने मानसिक दबाव को भी बढ़ाया है।

सूत्रों के मुताबिक, पूर्व UBI अधिकारियों का एक वर्ग यह भी महसूस करता है कि बैंक की निर्णय लेने वाली व्यवस्थाओं और उच्च प्रशासनिक पदों पर उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षा से कम रहा है। इससे कर्मचारियों में उपेक्षा की भावना और गहरी हुई है।

बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े विलय की सफलता केवल बैलेंस शीट और मुनाफे से नहीं मापी जाती, बल्कि कर्मचारियों के विश्वास, सम्मान और संतुष्टि से भी तय होती है। यदि पाँच वर्ष बाद भी कर्मचारियों का एक वर्ग स्वयं को हाशिए पर महसूस कर रहा है, तो यह विषय गंभीर समीक्षा की मांग करता है।

अब निगाहें बैंक प्रबंधन और संबंधित नीति-निर्माताओं पर हैं कि वे इन शिकायतों और आशंकाओं को किस प्रकार संबोधित करते हैं। कर्मचारियों की मांग है कि वरिष्ठता, प्रमोशन, ट्रांसफर और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों की निष्पक्ष समीक्षा कर सभी अधिकारियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ।

“विलय का उद्देश्य संस्थाओं को जोड़ना था, लेकिन यदि कर्मचारी स्वयं को अलग-थलग महसूस करें, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि मानवीय चिंता का भी विषय बन जाता है।”


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