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अभिषेक बनर्जी पर हमले का वीडियो वायरल, ममता बनर्जी समेत विपक्षी नेताओं ने की कड़ी निंदा

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है, जबकि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और टीएमसी के अन्य नेताओं ने भी हमले की कड़ी निंदा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं

ST.News Desk

कोलकाता में टीएमसी सांसद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि सोनारपुर इलाके में लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया, जहां धक्का-मुक्की और हंगामे के दौरान उनके कपड़े फट गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस मामले पर मुख्यमंत्री ममता banerjee ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए भाजपा पर हमला बोला। ममता ने लिखा, “शासक हत्यारे बन गए- भाजपा पर शर्म आती है।”

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी घटना की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी संवेदनशील स्थिति में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था का अभाव गंभीर चिंता का विषय है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि हिंसा प्रभावित परिवारों से मिलने गए एक विपक्षी सांसद पर हमला लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। खरगे ने केंद्र और राज्य सरकार से सभी राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी घटना को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी विपक्षी दल के एक प्रमुख नेता हैं और उनकी सुरक्षा में चूक गंभीर मामला है। उन्होंने गृह मंत्री से इस संबंध में जवाब देने की मांग की।

वहीं, टीएमसी नेता कुनाल घोष ने भी हमले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ हुई हिंसा और अभद्र व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ऐसी स्थिति को लंबे समय तक जारी रहने की अनुमति कैसे दी गई।

घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी दल इस मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों और नेताओं की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि घटना को लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।


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