मास्टर प्लान-2031 समेत इन मुद्दों पर अब अगले महीने फैसला संभव
चंडीगढ़: चंडीगढ़ के भविष्य और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर होने वाले फैसले एक बार फिर टल गए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah की चंडीगढ़ से जुड़ी अहम बैठक दूसरी बार टली की अध्यक्षता में गुरुवार को दिल्ली में प्रस्तावित अहम बैठक स्थगित कर दी गई। इस बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने वाले थे। अब बैठक अगले महीने होने की संभावना जताई जा रही है। बैठक के स्थगित होने से चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में बदलाव, लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने, पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटीज को मालिकाना हक देने और मेयर के कार्यकाल में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर फैसला फिलहाल टल गया है।
दूसरी बार स्थगित हुई बैठक
चंडीगढ़ से जुड़े इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय के लिए पहले भी बैठक प्रस्तावित की गई थी, लेकिन वह बैठक भी स्थगित हो गई थी। अब दूसरी बार बैठक टलने के बाद शहरवासियों और संबंधित वर्गों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। लंबे समय से इन मुद्दों पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से इन प्रस्तावों को गृह मंत्रालय के समक्ष विस्तार से प्रस्तुत किया जाना है। अब सभी की नजर अगले महीने प्रस्तावित बैठक पर टिकी हुई है।
मास्टर प्लान-2031 में बदलाव का प्रस्ताव
बैठक में मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलावों पर भी चर्चा होनी है। इसके तहत शहर के कुछ चिह्नित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों के लिए विकास नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है। प्रस्तावित बदलावों में कुछ क्षेत्रों में एफएआर (Floor Area Ratio) को 3.0 करने, चयनित इलाकों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों को अनुमति देने और औद्योगिक प्लॉटों के विभाजन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन बदलावों को मंजूरी मिलने पर संबंधित क्षेत्रों में निर्माण और संपत्ति के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बड़ा परिवर्तन हो सकता है।
लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव
चंडीगढ़ की लीजहोल्ड व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव भी लंबे समय से चर्चा में है। इस प्रस्ताव पर फैसला होने से संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फ्रीहोल्ड का रास्ता खुलने पर बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियों का स्वामित्व अधिक स्पष्ट और स्थायी हो सकता है। इससे करोड़ों रुपये की संपत्तियों के आर्थिक इस्तेमाल और लेनदेन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटीज को मालिकाना हक
चंडीगढ़ की पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाले अलॉटीज को स्थायी मालिकाना हक देने का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। लंबे समय से इन कॉलोनियों के निवासियों की ओर से संपत्ति पर स्थायी अधिकार दिए जाने की मांग उठती रही है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर हजारों परिवारों को अपनी संपत्ति से जुड़े अधिकारों के मामले में बड़ी राहत मिल सकती है।
मेयर के कार्यकाल पर भी नजर
चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर के कार्यकाल में बदलाव का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। प्रस्ताव के अनुसार मेयर का कार्यकाल मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष किए जाने पर विचार किया जाना है। नगर निगम चुनाव प्रक्रिया नजदीक होने के कारण इस प्रस्ताव का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व भी बढ़ गया है। यदि इस पर फैसला होता है तो इसका सीधा असर नगर निगम की कार्यप्रणाली और मेयर के कार्यकाल की व्यवस्था पर पड़ सकता है।
अगले महीने बैठक होने की संभावना
प्रस्तावित बैठक दूसरी बार स्थगित होने के बाद अब अगले महीने बैठक आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से संबंधित प्रस्तावों और बदलावों को लेकर गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुति दी जानी है। यदि अगले महीने बैठक आयोजित होती है और प्रस्तावों पर निर्णय लिया जाता है तो चंडीगढ़ से जुड़े कई लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठ सकता है। वहीं, यदि बैठक एक बार फिर स्थगित होती है तो इन मामलों पर फैसला और आगे खिसक सकता है। फिलहाल चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031, लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने, पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटीज को मालिकाना हक और मेयर के कार्यकाल से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।

