New Delhi : दिल्ली में 1 नवंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की रैली से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने SIR, मुस्लिम नेतृत्व और समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि SIR के मुद्दे पर उनकी लड़ाई अलग है। ओवैसी ने सपा के मुस्लिम नेताओं पर निशाना साधते हुए मुस्लिम समाज से अपनी राजनीतिक ताकत खड़ी करने की अपील की।
SIR पर ओवैसी की लड़ाई अलग
INDIA गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करने जा रहा है। इस रैली में विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे उठाने की तैयारी में हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी इस अभियान में भाग लेने की अपील की है।
इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि SIR के मामले में उनकी लड़ाई अलग है। उनके बयान से विपक्षी राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर बहस तेज हो सकती है।
‘मुसलमान अब दरी नहीं बिछाएगा’
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बोलते हुए ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेताओं को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के मुस्लिम नेता मुस्लिम समाज की स्वतंत्र राजनीतिक कयादत करने के बजाय पार्टी नेतृत्व के साथ चलते हैं। ओवैसी ने कहा, “मुसलमान अब दरी नहीं बिछाएगा।” उनका कहना था कि मुस्लिम समाज को अपनी राजनीतिक ताकत खड़ी करनी चाहिए और अपने नेतृत्व को मजबूत करना चाहिए।
सांसद इकरा हसन और विधायक नाहिद हसन का जिक्र करते हुए भी ओवैसी ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें मंच से ‘अस्सलामुअलैकुम’ कहने तक की हिम्मत नहीं है। साथ ही ओवैसी ने कहा कि उन्हें देश में कहीं से भी चुनाव लड़ने का अधिकार है।
जामिया और JNU के मुद्दे पर क्या बोले ओवैसी?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े नारों के मुद्दे पर ओवैसी ने विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि आपत्तिजनक नारे लिखे गए हैं तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई होनी चाहिए। ओवैसी ने विश्वविद्यालयों के कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जामिया के छात्रों की मांगों को जायज बताया।ये ओवैसी के आरोप और विचार हैं। संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया तथा मामले के आधिकारिक तथ्यों की पुष्टि अलग से किया जाना जरूरी है।
शरजील इमाम पर बोले- इंसाफ करना कोर्ट का काम
शरजील इमाम के मामले पर ओवैसी ने कहा कि किसी व्यक्ति की विचारधारा से असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उसे न्याय से वंचित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी की विचारधारा पसंद करना या न करना अलग बात है, लेकिन न्याय का फैसला अदालत को करना चाहिए। ओवैसी ने मामले की न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ने देने की बात कही।
INDIA गठबंधन की रैली से पहले क्यों अहम है बयान?
दिल्ली में प्रस्तावित रैली का मुख्य मुद्दा SIR और कथित वोट चोरी है, लेकिन ओवैसी के बयान ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विपक्षी दलों की रणनीति पर भी चर्चा छेड़ दी है। ओवैसी की टिप्पणी से उत्तर प्रदेश में AIMIM और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद फिर चर्चा में आ सकते हैं। हालांकि, इस बयान का चुनावी असर क्या होगा, यह आने वाले समय में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और जनता के रुख से स्पष्ट होगा।






















