मुस्कान और साहिल ने हाईकोर्ट में दी फांसी की सजा को चुनौती
मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मेरठ की जिला अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से संयुक्त अपील दाखिल कर दोषसिद्धि और फांसी की सजा को रद्द करने की मांग की है।
दोषसिद्धि और मृत्युदंड के फैसले को चुनौती
मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने इसे ‘विरल से विरलतम’ श्रेणी का मामला मानते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
अपील में क्या मांग की गई?
रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को गैरकानूनी और मनमाना बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की है। अपील में दोषसिद्धि के साथ सजा को भी चुनौती दी गई है। अब हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत के फैसले और अपील में उठाए गए कानूनी आधारों पर विचार किया जाएगा।
मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण
मृत्युदंड के मामलों में निचली अदालत की सजा पर हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मेरठ की अदालत का मृत्युदंड संबंधी आदेश पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है। इस प्रक्रिया में हाईकोर्ट सजा की वैधता और मामले के रिकॉर्ड की समीक्षा करेगा।
क्या है नीले ड्रम वाला हत्याकांड?
यह मामला मार्च 2025 में मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। सौरभ का शव एक नीले प्लास्टिक ड्रम में मिला था, जिसे सीमेंट से बंद किया गया था। मामले की जांच के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया था। लंबी सुनवाई और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर विचार करने के बाद जिला अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था।
अब इस चर्चित मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई होगी। हाईकोर्ट का निर्णय ही तय करेगा कि निचली अदालत की दोषसिद्धि और मृत्युदंड के आदेश को बरकरार रखा जाएगा या उनमें कोई बदलाव होगा।
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