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PM मोदी के खिलाफ अपशब्द मामला

PM मोदी के खिलाफ अपशब्द मामला: क्या सिर्फ गाली देने पर हो सकती है जेल? जानिए BNS, सुप्रीम कोर्ट और कानून क्या कहते हैं

Posted on August 2, 2026August 2, 2026 By Chhavi Singh

जंतर-मंतर विवाद के बाद क्यों छिड़ी कानूनी बहस?

ST.News Desk

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपशब्दों और आपत्तिजनक पोस्टरों का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में एक नई कानूनी बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या किसी को गाली देने पर जेल हो सकती है? क्या हर अभद्र टिप्पणी पर एफआईआर दर्ज होती है, या कानून इसके लिए अलग-अलग परिस्थितियों को देखता है?

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम लाइव के दौरान इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें और उनकी दिवंगत मां के (PM मोदी के खिलाफ अपशब्दखिलाफ अपशब्द कहे गए, लेकिन वह उन बच्चों को सजा नहीं, बल्कि माफी और सही मार्गदर्शन देना चाहते हैं। उन्होंने समाज से भी अपील की कि गुमराह युवाओं को सही रास्ता दिखाने में सहयोग करें।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET Paper Leak Protest के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद एक अधिवक्ता ने नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दर्ज कराई।

एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह के अनुसार शिकायत मिलने पर Zero FIR दर्ज की गई। इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) लगाई गई हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि कथित टिप्पणियों से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और समाज में वैमनस्य तथा सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हुई।

आरोपी लड़की ने क्या कहा?

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सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो सामने आया, जिसमें संबंधित लड़की खुद को 15 वर्ष की बताते हुए पूरे देश से माफी मांगती दिखाई देती है।

हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वीडियो में लड़की का दावा है कि वह दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गई थी और वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आकर उसने भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अनुचित बातें कह दीं। उसने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताते हुए भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने की बात कही।

क्या सिर्फ गाली देने पर जेल हो सकती है?

यह इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।

भारतीय कानून के अनुसार सिर्फ गाली देना अपने-आप में अपराध नहीं माना जाता।

किसी भी मामले में पुलिस और अदालत यह देखती हैं—

  • गाली किस परिस्थिति में दी गई?
  • उसका उद्देश्य क्या था?
  • उससे क्या प्रभाव पड़ा?
  • क्या उससे सार्वजनिक शांति भंग हुई?
  • क्या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा?
  • क्या बयान किसी अन्य कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है?

अगर इन परिस्थितियों में कानून के तहत अपराध बनता है, तभी संबंधित धाराएं लागू होती हैं।

इस मामले में लगी BNS की धाराएं क्या कहती हैं?

BNS Section 352

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी का अपमान करता है और उसे पता है कि इससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है या अपराध होने की संभावना है, तो यह धारा लागू हो सकती है।

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सजा

  • दो साल तक की जेल
  • या जुर्माना
  • या दोनों

BNS Section 353(1)

अगर कोई व्यक्ति झूठी सूचना, अफवाह या ऐसी सामग्री प्रसारित करता है जिससे—

  • जनता में भय फैल सकता हो,
  • सार्वजनिक शांति भंग हो सकती हो,
  • राज्य के खिलाफ अपराध की संभावना बनती हो,
  • या समुदायों के बीच तनाव पैदा हो,

तो यह धारा लागू हो सकती है।

सजा

  • तीन साल तक की जेल
  • या जुर्माना
  • या दोनों

BNS Section 356(1): मानहानि (Defamation)

अगर कोई व्यक्ति शब्दों, लिखित सामग्री, चित्र, पोस्टर, संकेत या किसी अन्य माध्यम से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला आरोप लगाता या प्रकाशित करता है, तो इसे मानहानि माना जा सकता है।

सार्वजनिक जगह पर गाली देने पर कौन-सी धारा लागू हो सकती है?

अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करता है या अश्लील हरकत करता है, जिससे आसपास मौजूद लोगों को परेशानी होती है, तो BNS Section 296 लागू हो सकती है।

सजा

  • तीन महीने तक की जेल
  • ₹1,000 तक जुर्माना
  • या दोनों

अगर अश्लील पोस्टर या सामग्री दिखाई जाए तो?

अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अश्लील पोस्टर, चित्र, किताब, पर्चे या इलेक्ट्रॉनिक सामग्री का प्रदर्शन, वितरण या बिक्री करता है, तो BNS Section 294 लागू हो सकती है।

पहली बार दोषी पाए जाने पर

  • दो साल तक की जेल
  • ₹5,000 तक जुर्माना

दूसरी बार दोषी पाए जाने पर

  • पांच साल तक की जेल
  • ₹10,000 तक जुर्माना

अगर यही सामग्री किसी बच्चे को दिखाई या बेची जाती है, तो BNS Section 295 के तहत और अधिक कठोर सजा का प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सिर्फ गाली देना या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना अपने-आप में अश्लीलता नहीं माना जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि—

  • गाली देना,
  • अभद्र भाषा,
  • और अश्लीलता,

तीनों अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी शब्द को कानूनी रूप से अश्लील तभी माना जाएगा, जब उसमें यौन या कामुक तत्व हों और उससे लोगों की नैतिकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो।

अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता का अपराध साबित करने के लिए केवल गाली देना पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह भी साबित करना होगा कि—

  • कथित शब्द सार्वजनिक स्थान पर बोले गए थे।
  • उनसे वास्तव में अन्य लोगों को परेशानी हुई थी।

अगर ये दोनों बातें साबित नहीं होतीं, तो केवल अपशब्दों के आधार पर सार्वजनिक अश्लीलता का अपराध स्वतः सिद्ध नहीं माना जा सकता।

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जंतर-मंतर विवाद के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सिर्फ गाली देना हर मामले में अपराध नहीं होता। कानून हर मामले की परिस्थितियों, उद्देश्य और उसके प्रभाव को देखकर तय करता है कि कौन-सी धाराएं लागू होंगी। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होता है।

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