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पेट्रोल-डीजल और CNG के बढ़ते दामों से बढ़ी महंगाई की चिंता, जानिए क्यों महंगा हो रहा ईंधन

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ST.News Desk

देशभर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं, जबकि सीएनजी भी लगातार महंगी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

कितनी बढ़ी हैं कीमतें?

ताजा संशोधन के तहत पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं, सीएनजी की कीमत 1 रुपये बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। पिछले कुछ दिनों में सीएनजी करीब 4 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है। मुंबई में पेट्रोल 108.49 रुपये और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसका मुख्य कारण है। फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और बढ़ती रिफाइनिंग लागत ने भी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है।

चुनाव के बाद क्यों बढ़े दाम?

अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें लगभग स्थिर थीं। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की गई थी। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी कारणों से कीमतों में बढ़ोतरी को रोका गया था। अब चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तेल कंपनियों ने चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं।

क्या तेल कंपनियां अभी भी घाटे में हैं?

सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कंपनियां अभी भी प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या असर?

ईंधन महंगा होने का सीधा असर परिवहन और माल ढुलाई पर पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं। अप्रैल में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत और थोक महंगाई दर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई। बढ़ती ऊर्जा लागत को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नागरिकों और सरकारी विभागों से ईंधन बचाने, गैर-जरूरी यात्राएं कम करने और रिमोट वर्किंग अपनाने की अपील की है। कई राज्य सरकारों ने भी अपने विभागों को यात्रा कम करने के निर्देश दिए हैं।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार पर हमला कर रहा है। Arvind Kejriwal ने ईंधन संकट को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि रूस और ईरान भारत को सस्ता तेल और गैस देने को तैयार हैं, ऐसे में सरकार को इस दिशा में फैसला लेना चाहिए।

वहीं सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


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