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Monsoon Rain Update: जुलाई में मॉनसून पर लगा ब्रेक, देश में 23% कम बारिश; जानिए कब लौटेगी झमाझम बरसात

Posted on July 18, 2026July 18, 2026 By Chhavi Singh
  • 15 जुलाई तक देशभर में सामान्य से करीब 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है.
  • पूर्वी, पूर्वोत्तर, दक्षिण और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.
  • IMD के अनुसार पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश हो सकती है, लेकिन उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में मॉनसून कुछ दिन और कमजोर रह सकता है.

Monsoon Rain Update: मॉनसून पर जुलाई में अचानक ब्रेक लग गया है. जून में अच्छी शुरुआत के बाद जुलाई के पहले पखवाड़े में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गईं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के मुताबिक देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बारिश नहीं होने से उमस भरी गर्मी परेशान कर रही है. वहीं, बारिश पर निर्भर खेती वाले इलाकों में किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है.

Monsoon Rain Update : जुलाई को मॉनसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है. इसी दौरान खरीफ की फसलों की बुआई तेज होती है और खेतों को पर्याप्त पानी मिलता है. लेकिन इस बार जुलाई के शुरुआती दो हफ्तों में मॉनसून की चाल कमजोर दिखाई दी है. कई इलाकों में लगातार कई दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई. इससे धान, मक्का, दाल और दूसरी खरीफ फसलों की बुआई तथा शुरुआती बढ़त प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है.

जुलाई में कमजोर पड़े मॉनसून के बीच बारिश का इंतजार करते लोग और सूखे खेत, देश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश को दिखाता मौसम अपडेट
जुलाई को मॉनसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है.

Monsoon Rain Update : लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि मॉनसून दोबारा कब सक्रिय होगा. हालांकि देश के सभी हिस्सों में एक साथ तेज बारिश लौटने की संभावना फिलहाल नहीं है. IMD के ताजा पूर्वानुमान में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. इसके उलट उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कुछ दिन तक कमजोर रह सकती हैं.

15 जुलाई तक देश में कितनी कम हुई बारिश?

उपलब्ध बारिश के आंकड़ों के मुताबिक 15 जुलाई तक देशभर में लगभग 227 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 294.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. इस हिसाब से बारिश सामान्य से लगभग 23 प्रतिशत कम रही.

Monsoon Rain Update : बारिश की कमी सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है. पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में करीब 348 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश लगभग 540 मिलीमीटर मानी गई है. इस आधार पर यहां बारिश की कमी करीब 36 प्रतिशत रही.

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उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग 137 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.

Monsoon Rain Update : उत्तर-पश्चिम भारत में लगभग 137 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 168 मिलीमीटर है. यहां बारिश में करीब 19 प्रतिशत की कमी बनी हुई है. मध्य भारत में करीब 273 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर लगभग 315 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी. इस क्षेत्र में बारिश की कमी लगभग 13 प्रतिशत रही.

Monsoon Rain Update : दक्षिण भारत में करीब 190 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. सामान्य बारिश लगभग 255.3 मिलीमीटर मानी गई है. इस हिसाब से दक्षिण भारत में बारिश की कमी करीब 26 प्रतिशत है. इन आंकड़ों से साफ है कि जुलाई के दौरान बारिश का वितरण काफी असमान रहा है. कुछ पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों में भारी बारिश हुई है, जबकि उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों के बड़े हिस्से लंबे सूखे दौर का सामना कर रहे हैं.

उत्तर भारत में क्यों कमजोर पड़ा मॉनसून?

उत्तर भारत में मॉनसून की सुस्ती की एक बड़ी वजह मॉनसून ट्रफ की स्थिति मानी जा रही है. मॉनसून ट्रफ कम दबाव वाला एक लंबा क्षेत्र होता है, जिसके आसपास बारिश कराने वाले बादल और हवाएं सक्रिय रहती हैं.

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हिमालयी राज्यों, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत में बारिश बढ़ सकती है.

Monsoon Rain Update : जब यह ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसककर हिमालय की तलहटी के पास पहुंच जाती है, तो मैदानी इलाकों में बारिश की गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश घट जाती है. इसके उलट हिमालयी राज्यों, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत में बारिश बढ़ सकती है. यही कारण है कि देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति दिखाई दे सकती है, जबकि दूसरे हिस्सों में उमस, गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियां बनी रहती हैं.

बंगाल की खाड़ी का सिस्टम कितना महत्वपूर्ण?

Monsoon Rain Update : देश में जुलाई की बारिश काफी हद तक बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों पर निर्भर करती है. खाड़ी में बनने वाले सिस्टम पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक बारिश पहुंचाते हैं. जब बंगाल की खाड़ी में लगातार मजबूत सिस्टम नहीं बनते, तो मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में मॉनसून की हवाओं को पर्याप्त ताकत नहीं मिलती. इससे बारिश का दौर टूट जाता है और मॉनसून ब्रेक जैसी स्थिति बन जाती है.

हालांकि 15 जुलाई के IMD अपडेट में ओडिशा में अत्यधिक भारी बारिश और 16 तथा 17 जुलाई को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई थी. बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है.

क्या अल नीनो का भी पड़ रहा है असर?

Monsoon Rain Update : प्रशांत महासागर में बन रही अल नीनो की स्थिति भी भारतीय मॉनसून के लिए महत्वपूर्ण है. अल नीनो के दौरान मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह सामान्य से अधिक गर्म हो जाती है. इससे वैश्विक हवा और बारिश के पैटर्न प्रभावित होते हैं. हर अल नीनो वर्ष में भारत में सूखा पड़े, यह जरूरी नहीं है. मॉनसून पर हिंद महासागर की स्थिति, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम, अरब सागर से आने वाली नमी और मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन जैसे कई दूसरे मौसमी कारकों का भी प्रभाव पड़ता है.

फिर भी मजबूत अल नीनो मॉनसून की अनिश्चितता बढ़ा सकता है. ताजा आकलनों में अल नीनो के 2026 के मॉनसून और उसके बाद भी बने रहने की आशंका जताई गई है. इससे बारिश के वितरण और लंबे सूखे अंतराल को लेकर चिंता बनी रह सकती है.

किसानों की क्यों बढ़ रही चिंता?

Monsoon Rain Update : जुलाई में बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ की खेती पर पड़ता है. धान जैसी फसलों को रोपाई के समय लगातार पानी की जरूरत होती है. मक्का, दाल, कपास, सोयाबीन और मूंगफली की फसलों के लिए भी शुरुआती बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है. जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां लंबे समय तक बारिश नहीं होने से बुआई में देरी हो सकती है. पहले से बोई गई फसलों में नमी की कमी पैदा हो सकती है. किसानों को दोबारा बुआई भी करनी पड़ सकती है, जिससे लागत बढ़ने का खतरा रहता है.

हालांकि कुछ दिनों की देरी से पूरे सीजन की फसल खराब होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. जुलाई के आखिरी हिस्से और अगस्त में अच्छी तथा व्यापक बारिश होने पर मिट्टी की नमी में सुधार हो सकता है. इससे शुरुआती कमी की कुछ हद तक भरपाई संभव है.

क्या बारिश के घाटे की भरपाई हो पाएगी?

Monsoon Rain Update : बारिश के घाटे की भरपाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जुलाई के बाकी दिनों और अगस्त में मॉनसून कितना सक्रिय रहता है. बंगाल की खाड़ी में लगातार कम दबाव वाले क्षेत्र बनने और उनके मध्य तथा उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ने पर बारिश में सुधार हो सकता है. लेकिन बारिश का सिर्फ (Monsoon Rain Update) कुल आंकड़ा बढ़ना पर्याप्त नहीं है. खेती के लिए बारिश का सही समय और सभी इलाकों में संतुलित वितरण भी जरूरी है. बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने से राष्ट्रीय बारिश का घाटा कम हो सकता है, लेकिन इससे खेतों को हमेशा फायदा नहीं होता. उलटे बाढ़, जलभराव, मिट्टी के कटाव और फसलों के नुकसान का खतरा बढ़ सकता है.

इसलिए मॉनसून की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल राष्ट्रीय औसत से नहीं, बल्कि राज्य और जिला स्तर पर बारिश के वितरण से करना होगा.

16 से 20 जुलाई तक कहां होगी बारिश?

Monsoon Rain Update : IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां मजबूत रह सकती हैं. ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में (Monsoon Rain Update) भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है. मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश का नया दौर दिखाई दे सकता है. हालांकि दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मैदानी हिस्सों में बारिश व्यापक और लगातार होने के बजाय अलग-अलग स्थानों पर हो सकती है.

IMD ने 15 जुलाई के अपडेट में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में अगले पांच दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने की संभावना जताई थी. पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी अगले सात दिनों तक बारिश सामान्य से कम रह सकती है. इसलिए 16 से 20 जुलाई के बीच पूरे देश में मॉनसून की जोरदार वापसी का दावा करना सही नहीं होगा. अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न अलग रहने की संभावना है.

आगे मौसम का कैसा रहेगा मिजाज?

Monsoon Rain Update : देश के पूर्वी हिस्सों में (Monsoon Rain Update) सक्रिय बारिश से स्थानीय स्तर पर राहत मिल सकती है. बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने, निचले क्षेत्रों में पानी भरने और भूस्खलन का खतरा भी रह सकता है. दूसरी ओर दिल्ली-NCR और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में उमस और गर्मी से तुरंत बड़ी राहत मिलने की संभावना सीमित है. हल्की या छिटपुट बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक मॉनसून बारिश के लिए अनुकूल सिस्टम और मॉनसून ट्रफ की स्थिति में बदलाव जरूरी होगा.

Monsoon Rain Update : फिलहाल मॉनसून का ब्रेक स्थायी नहीं माना जा रहा है, लेकिन उसकी वापसी पूरे देश में एक साथ नहीं होगी. आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम और मॉनसून ट्रफ की दिशा तय करेगी कि जुलाई की बारिश का घाटा कितना कम हो पाता है.

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