- अयोध्या में निषाद समाज के कार्यक्रम में मछली परोसे जाने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है.
- मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सावन में मछली की दावत पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा.
- कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका का हवाला देते हुए कहा कि वह समाज के कार्यक्रम में शामिल हुए थे.
उत्तर प्रदेश में सावन के महीने में मछली की दावत को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. अयोध्या में निषाद समाज की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में मछली परोसे जाने के बाद भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है. वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए निषाद समाज की परंपरा और आजीविका का हवाला दिया है. उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में नदियों और बालू के पट्टों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए.
अयोध्या में हुए इस कार्यक्रम को लेकर रविवार से विवाद शुरू हुआ था. कार्यक्रम में अजय राय समेत कांग्रेस के कई नेता शामिल हुए थे. मछली परोसे जाने को लेकर राजनीतिक विरोध के बाद अजय राय ने कहा है कि निषाद समाज के लोगों ने कार्यक्रम आयोजित किया था और मछली पकड़ना, बेचना तथा खाना उनकी पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ा हुआ है. दूसरे मीडिया स्रोतों में भी अजय राय की ओर से कहा गया है कि यदि उनके मछली खाने की तस्वीर है तो उसे सार्वजनिक किया जाए.
ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस से पूछे सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मछली दावत को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा. राजभर ने कहा कि अगर सावन के महीने में मछली की दावत होती है तो यह हद से ज्यादा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो चाहे करती है और उसके नेता हर चीज में माहिर हैं.
राजभर ने मछली बनाने के तरीके को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर मछली में प्याज और लहसुन डाला गया है तो वह नॉन-वेज है, जबकि बिना प्याज-लहसुन के बनाई गई मछली को वेज माना जा सकता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि कार्यक्रम में मछली प्याज-लहसुन के साथ बनाई गई थी या उसके बिना.
मछली भोज को लेकर केवल राजभर ही नहीं, बल्कि भाजपा के दूसरे नेताओं ने भी कांग्रेस पर हमला बोला है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अजय राय के अयोध्या दौरे और कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए हैं. दूसरी ओर कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अजय राय कार्यक्रम में शामिल जरूर हुए थे, लेकिन उनके मछली खाने का कोई प्रमाण नहीं है.
अजय राय ने बताया क्यों गए थे कार्यक्रम में

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि अयोध्या पहुंचने के बाद उन्होंने भगवान राम से जुड़े धार्मिक स्थलों पर दर्शन-पूजन किया. उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में भी पूजा-अर्चना की. इसके बाद वह निषाद समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए.
अजय राय के मुताबिक कार्यक्रम निषाद समाज का था और समाज के लोगों ने ही मछली तैयार की थी. उन्होंने कहा कि मछली पकड़ना, बेचना और खाना निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका और जीवनशैली से जुड़ा हुआ है. कार्यक्रम के आयोजक राम निहाल निषाद ने भी खान-पान को व्यक्तिगत अधिकार बताते हुए निषाद समाज की परंपरा का हवाला दिया है.
नदियों और तालाबों के पट्टों का भी उठाया मुद्दा
अजय राय ने विवाद के बीच निषाद समाज की आर्थिक स्थिति का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन के दौरान निषाद समाज को सम्मान दिया गया और नदियों तथा तालाबों की जमीन पट्टे पर देने की व्यवस्था थी. इससे नदी और मछली पालन से जुड़े लोगों को रोजगार और आजीविका का अवसर मिलता था.
उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अब व्यवस्था बदल गई है. उनका आरोप है कि नदियों और बालू के ठेकों में बड़ी कंपनियों को पट्टे दिए जा रहे हैं. अजय राय ने कहा कि निषाद समाज के लोगों ने उनके सम्मान में कार्यक्रम किया था और समाज के लोगों के प्रेम के कारण वह वहां शामिल हुए.
मछली भोज पर बढ़ता जा रहा राजनीतिक विवाद
अयोध्या में हुए इस कार्यक्रम पर विवाद अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है. भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं के बयान सामने आने के बाद यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है. स्थानीय संतों की ओर से भी सावन में अयोध्या में मछली भोज के आयोजन पर आपत्ति जताई गई है, जबकि आयोजक पक्ष इसे निषाद समाज की संस्कृति और खान-पान के अधिकार से जोड़ रहा है.
कांग्रेस की ओर से अजय राय के मछली खाने के आरोपों को चुनौती दी गई है. अजय राय ने कहा है कि यदि उनकी ऐसी कोई तस्वीर सामने आती है तो वह इस्तीफा देने को तैयार हैं. इस बीच मछली भोज से शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक परंपरा, खान-पान के अधिकार और निषाद समाज की आजीविका जैसे मुद्दों तक पहुंच गया है.

