crossorigin="anonymous"> उत्तर भारत में मानसून की रफ्तार धीमी, बारिश का इंतजार बरकरार; क्या अल नीनो बन रहा है वजह? - Sanchar Times

उत्तर भारत में मानसून की रफ्तार धीमी, बारिश का इंतजार बरकरार; क्या अल नीनो बन रहा है वजह?

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आईएमडी बोला- मानसून आगे बढ़ रहा है, लेकिन मजबूत वेदर सिस्टम की कमी से नहीं हो रही व्यापक बारिश; जुलाई के पहले सप्ताह में राहत के संकेत

ST.News Desk

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर भारत की ओर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई इलाकों में अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब मानसून पहुंच चुका है, तो बारिश क्यों नहीं हो रही?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों में मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। हालांकि, मानसून की आधिकारिक प्रगति का मतलब यह नहीं है कि हर जिले में एक साथ बारिश शुरू हो जाएगी।

ताजा सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, मानसूनी बादल फिलहाल मध्य भारत, बंगाल की खाड़ी, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सक्रिय हैं, जबकि दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बड़े क्षेत्रों में अभी भी पर्याप्त बादल नहीं बन पाए हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इन इलाकों में व्यापक बारिश के लिए जरूरी मजबूत मौसम प्रणाली फिलहाल विकसित नहीं हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की मौजूदा सुस्ती के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) की स्थिति बनने की संभावना, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) की कमजोर गतिविधि, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में शुष्क पश्चिमी हवाएं, कमजोर सोमाली जेट, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाले सिस्टम का अभाव और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की न्यूट्रल स्थिति शामिल हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र भारतीय मानसून के लिए इंजन का काम करते हैं। यही सिस्टम समुद्र से नमी खींचकर मध्य और उत्तर भारत तक पहुंचाते हैं। फिलहाल ऐसे प्रभावी सिस्टम नहीं बनने से मानसूनी हवाएं कमजोर बनी हुई हैं और बारिश सीमित क्षेत्रों तक सिमट गई है।

हालांकि राहत की खबर भी है। मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि पूर्वी हिंद महासागर में भूमध्य रेखा के उत्तर में एक बड़ा ट्रॉपिकल मौसम तंत्र विकसित हो रहा है। अगले चार से सात दिनों में इसके बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है और मानसूनी हवाओं को मजबूती मिलेगी। यदि ऐसा होता है, तो जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।

मौसम विभाग ने लोगों से ताजा मौसम पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।


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