मुख्यमंत्री पशुधन योजना: झारखंड में बकरी, सूकर और बतख पालन के जरिए ग्रामीण किसानों को स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। राज्य सरकार की मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को पशुपालन गतिविधियों के लिए 75 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 से अब तक 2.17 लाख से अधिक लाभुकों को योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी गई है।

2.17 लाख से अधिक लाभुकों को मिला लाभ
मुख्यमंत्री पशुधन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देना, किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करना और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत बकरी पालन, सूकर पालन, बतख पालन, बैकयार्ड लेयर बर्ड और ब्रायलर बर्ड जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020-21 से अब तक कुल 2,17,223 लाभुकों के खातों में योजना की राशि भेजी गई है। वहीं, 1,79,757 लाभुकों के बीच बकरी, सूकर, बतख और अन्य पक्षियों का वितरण किया गया है। पूर्व में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी पशुधन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र और नए किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया था, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त हों।
एससी-एसटी लाभार्थियों को 90 प्रतिशत अनुदान
मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के पात्र लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। लाभार्थी को शेष 10 प्रतिशत राशि का योगदान करना होता है। सामान्य श्रेणी के पात्र लाभार्थियों के लिए अनुदान की दर 75 प्रतिशत बताई गई है।
योजना का लाभ देने के लिए चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। सबसे पहले ग्रामसभा के स्तर पर पात्र लाभार्थियों की सूची तैयार की जाती है। इसके बाद सूची को प्रखंड स्तरीय समिति के पास भेजा जाता है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद जिला पशुपालन पदाधिकारी और उपायुक्त के स्तर पर अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद अंतिम लाभार्थी सूची तैयार होती है।
किस योजना में कितने लाभार्थियों को मिला लाभ?
पशुपालन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न घटकों के तहत लक्ष्य, डीबीटी और वितरण की स्थिति इस प्रकार है:
| योजना | निर्धारित लक्ष्य | डीबीटी लाभार्थी | वितरण पूरा |
|---|---|---|---|
| बकरी पालन | 1,02,101 | 84,317 | 69,026 |
| सूकर पालन | 19,549 | 16,567 | 13,769 |
| बैकयार्ड लेयर बर्ड | 11,394 | 9,219 | 5,325 |
| ब्रायलर बर्ड | 22,827 | 18,848 | 13,268 |
| बतख पालन | 1,44,440 | 88,272 | 76,543 |
इन आंकड़ों के मुताबिक, बतख पालन के लिए सबसे अधिक 1,44,440 का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें 88,272 लाभार्थियों तक डीबीटी राशि पहुंची और 76,543 लाभार्थियों के लिए वितरण पूरा किया गया। बकरी पालन में भी बड़ी संख्या में लाभार्थियों को सहायता मिली है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में सबसे अधिक प्रगति
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत सबसे अधिक प्रगति दर्ज की गई। इस दौरान 59,894 लाभार्थियों को डीबीटी का लाभ मिला, जबकि 54,061 लाभार्थियों के लिए पशुधन या पक्षियों का वितरण पूरा किया गया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 30,000 लाभार्थियों को डीबीटी और 22,646 लाभार्थियों को वितरण का लाभ दिया गया है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
मुख्यमंत्री पशुधन योजना से ग्रामीण परिवार खेती के साथ पशुपालन को आय के दूसरे स्रोत के रूप में अपना सकते हैं। बकरी, सूकर और बतख पालन जैसी गतिविधियां स्थानीय बाजारों में बिक्री के अवसर उपलब्ध करा सकती हैं। अनुदान मिलने से पात्र लाभार्थियों पर शुरुआती निवेश का बोझ भी कम हो सकता है।
हालांकि, वास्तविक आय पशुओं की संख्या, चारे की उपलब्धता, देखभाल, बीमारी से बचाव और स्थानीय बाजार में मिलने वाली कीमतों पर निर्भर करेगी। इच्छुक किसानों को आवेदन, पात्रता, अनुदान की दर और वर्तमान चयन प्रक्रिया की जानकारी अपने प्रखंड या जिला पशुपालन कार्यालय से सत्यापित करनी चाहिए।
झारखंड में मुख्यमंत्री पशुधन योजना ग्रामीण आजीविका और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को अपने क्षेत्र में आवेदन की उपलब्धता और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी संबंधित विभाग से प्राप्त करनी चाहिए।






















