
हैदर अली
सासाराम (संचारटाइम्स.न्यूज)

रोहतास जिले के सासाराम और आसपास के क्षेत्रों में चैत महीने के आगमन के साथ ही चैता गायन की धूम मची हुई है। भारतीय लोकसंस्कृति में हर मौसम के अपने गीत होते हैं, जैसे फागुन में फगुआ और सावन में कजरी। ठीक उसी तरह, चैत महीने में “चईता” के गीत गाए जाते हैं।
भगवान श्रीराम के जन्म माह होने के कारण इस दौरान उनके चरित्र और गुणों का गुणगान किया जाता है। साथ ही, खेतों में फसल कटाई के समय किसान जीवन पर आधारित गीत भी गाए जाते हैं। वहीं, फागुन में होली बीतने के बाद जब परदेशी अपने घर से दूर कमाने जाते हैं, तब उनके विरह में भी गीत रचे जाते हैं।
चईता का आकर्षण किसी भी लोकगीत से कम नहीं है। जिस तरह फगुआ में लोग मदमस्त रहते हैं, ठीक उसी तरह चैत महीने में भी मौसम के बदलाव के साथ यह परंपरा जीवंत हो उठती है। सासाराम के फजलगंज में आयोजित चैता गायन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग भाग ले रहे हैं और इस लोकसंस्कृति का आनंद उठा रहे हैं।
चैता गायक वीरेंद्र तिवारी उर्फ मुनि जी और विद्यासागर का कहना है कि इस समय उनकी व्यस्तता काफी बढ़ जाती है। बदले हुए परिवेश में भी ग्रामीण क्षेत्रों में इस आयोजन की परंपरा जीवंत बनी हुई है। खास बात यह है कि नई पीढ़ी भी अब धीरे-धीरे इस लोकसंस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है।
