पेड़ों को दोस्त मानते थे किशोर दा, जिंदगी के आखिरी दिनों में हो गए थे बेहद अकेले
भारतीय सिनेमा और संगीत जगत के दिग्गज कलाकार Kishore Kumar आज भी अपने सदाबहार गीतों और अनोखे अंदाज के लिए याद किए जाते हैं। उन्होंने अपने टैलेंट से लाखों लोगों को दीवाना बनाया, लेकिन निजी जिंदगी में वे हमेशा उतार-चढ़ाव और तन्हाई से जूझते रहे। चार शादियां करने के बावजूद जिंदगी के आखिरी दौर में किशोर दा इतने अकेले हो गए थे कि वे अपने बगीचे के पेड़ों से बातें किया करते थे
ST.News Desk
किशोर कुमार सिर्फ शानदार गायक ही नहीं थे, बल्कि बेहतरीन अभिनेता, संगीतकार और निर्माता भी थे। उनके गाने आज भी हर पीढ़ी के लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं। हालांकि, प्रोफेशनल सफलता के पीछे उनकी निजी जिंदगी लगातार टूटते रिश्तों और भावनात्मक संघर्षों से भरी रही।
पहली पत्नी: Ruma Guha Thakurta

किशोर कुमार ने पहली शादी 1950 में बंगाली अभिनेत्री और गायिका रुमा गुहा ठाकुरता से की थी। शुरुआत में दोनों का रिश्ता अच्छा रहा, लेकिन समय के साथ मतभेद बढ़ने लगे। किशोर चाहते थे कि शादी के बाद रुमा घर संभालें, जबकि रुमा अपने करियर पर ध्यान देना चाहती थीं। इसी वजह से दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और आखिरकार 1958 में दोनों का तलाक हो गया।
दूसरी पत्नी: Madhubala

पहले तलाक के बाद किशोर कुमार की जिंदगी में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मधुबाला आईं। दोनों ने 1960 में शादी की। उस दौर में मधुबाला को हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में गिना जाता था। लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। मधुबाला लंबे समय से दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और 1969 में उनका निधन हो गया। इस घटना ने किशोर कुमार को अंदर तक तोड़ दिया।
तीसरी पत्नी: Yogita Bali

मधुबाला की मौत के बाद काफी समय तक अकेले रहने के बाद किशोर कुमार ने जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश की और 1976 में अभिनेत्री योगिता बाली से शादी की। हालांकि यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया। दोनों के बीच अनबन बढ़ी और 1978 में तलाक हो गया।
चौथी पत्नी: Leena Chandavarkar

तीन असफल रिश्तों के बाद किशोर कुमार ने 1980 में अभिनेत्री लीना चंद्रावरकर से शादी की। माना जाता है कि लीना ने किशोर की जिंदगी में स्थिरता लाने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद किशोर दा अंदर से बेहद अकेले महसूस करते थे। 1987 में उनका निधन हो गया।
किशोर कुमार की तन्हाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1985 में पत्रकार Pritish Nandy को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनका कोई दोस्त नहीं है और उन्हें अपने पेड़ों से बातें करना ज्यादा पसंद है। एक बार जब एक रिपोर्टर ने उनकी तन्हाई का जिक्र किया, तो किशोर उसे अपने बगीचे में ले गए और वहां मौजूद पेड़ों का परिचय अपने सबसे करीबी दोस्तों के रूप में कराया।
पर्दे पर हमेशा हंसाने और गुनगुनाने वाले किशोर दा की जिंदगी का यह पहलू दिखाता है कि शोहरत और सफलता के बावजूद इंसान अंदर से कितना अकेला हो सकता है।

