Skip to content
  • X
  • Instagram
  • YouTube
  • Facebook
Sanchar Times

Sanchar Times

Hindi NEWS

  • होम
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • राज्य
    • दिल्ली/NCR
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • झारखण्ड
    • बिहार
    • मध्यप्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
    • हिमाचल
  • राजनीति
    • भाजपा
    • कांग्रेस
    • चुनाव
  • खेल
  • पर्यटन
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • संपादकीय
  • सोशल मीडिया
  • Toggle search form
श्रेणियांराष्ट्रीयअंतर्राष्ट्रीयराज्यराजनीतिखेलमनोरंजनसंपादकीयलाइफस्टाइलसोशल मीडिया
होम पर वापस जाएंदिल्ली/NCR
suprem court

सरकारें सभी निजी संपत्तियों को नहीं ले सकती कब्जे में : SC

Posted on November 6, 2024November 6, 2024 By Sanchar Times News

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बहुमत के फैसले में कहा कि संविधान के तहत सरकारों को आम भलाई के लिए निजी स्वामित्व वाले सभी संसाधनों को अपने कब्जे में लेने का अधिकार नहीं है। सीजेआई धनंजय चन्द्रचूड की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने 7:2 के बहुमत से कहा कि सरकारें कुछ मामलों में निजी संपत्तियों पर दावा कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 1983 में संजीव कोक मामले में दिए गए अपने फैसले को पलट दिया।


चीफ जस्टिस द्वारा सुनाए गए बहुमत के फैसले में जस्टिस कृष्णा अय्यर के पिछले फैसले को खारिज कर दिया गया जिसमें कहा गया था कि सभी निजी स्वामित्व वाले संसाधनों को संविधान के अनुच्छेद 39 (बी) के तहत वितरण के लिए सरकारों द्वारा अधिगृहीत किया जा सकता है। सीजेआई चंद्रचूड ने अपने और संविधान पीठ के छह अन्य न्यायाधीशों के लिए फैसला लिखा, जिसने इस जटिल कानूनी सवाल पर निर्णय किया कि क्या निजी संपत्तियों को अनुच्छेद 39 (बी) के तहत समुदाय के भौतिक संसाधन माना जा सकता है और आम भलाई के वास्ते वितरण के लिए सरकार के अधिकारियों द्वारा अपने कब्जे में लिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने उन कई फैसलों को पलट दिया, जिनमें समाजवादी सोच को अपनाया था और कहा गया था कि सरकारें आम भलाई के लिए सभी निजी संपत्तियों पर कब्जा कर सकती हैं। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सीजेआई द्वारा लिखे गए बहुमत के फैसले से आंशिक रूप से असहमति जताई, जबकि जस्टिस सुधांशु धूलिया ने सभी पहलुओं पर असहमति जताई।


अनुच्छेद 31सी, अनुच्छेद 39(बी) और (सी) के तहत बनाए गए कानून की रक्षा करता है जो सरकार को आम भलाई के वास्ते वितरण के लिए निजी संपत्तियों सहित समुदाय के भौतिक संसाधनों को अपने कब्जे में लेने का अधिकार देता है। शीर्ष अदालत ने 16 याचिकाओं पर सुनवाई की जिनमें 1992 में मुंबई स्थित प्रॉपर्टी ओनर्स एसोसिएशन (पीओए) द्वारा दायर मुख्य याचिका भी शामिल थी। पीओए ने महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) अधिनियम के अध्याय 8-ए का विरोध किया है। 1986 में जोड़ा गया यह अध्याय सरकारी प्राधिकारियों को भवनों और उस भूमि का अधिग्रहण करने का अधिकार देता है जिस पर वे बने हैं, यदि वहां रहने वाले 70 प्रतिशत लोग पुनस्र्थापन उद्देश्यों के लिए ऐसा अनुरोध करते हैं।

Post Views: 1
दिल्ली/NCR, राष्ट्रीय

Post navigation

Previous Post: दिल्ली से नहीं हट रही धुंध की परत
Next Post: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत

Special Report

  • AC LED TV
    1 अक्टूबर से AC, फ्रिज और LED TV महंगे हो सकते हैं, कंपनियां बढ़ा सकती हैं दाम
  • Pitra Paksha 2026
    Pitra Paksha 2026: पितृ पक्ष 26 या 27 सितंबर से? जानें भ्रम की असली वजह और सही तारीख
  • GENDER IDENTITY 1
    जेंडर आइडेंटिटी पर बढ़ती बहस: युवाओं, सोशल मीडिया और चिकित्सा से जुड़े सवाल
  • Ghaziabad News: सिद्धार्थ विहार में युवती गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती
  • Ajmer News: इजरायली महिला पर्यटक से अभद्रता, वायरल वीडियो पर चार गिरफ्तार
  • एक्सप्रेसवे पर पलटा मछलियों से भरा कैंटर
  • खाने के बाद गैस और पेट फूलने की समस्या
  • दवा ₹2,700 की, MRP ₹27,000 पर सवाल

Sanchar Times

देश-दुनिया, राजनीति, बिजनेस, खेल और मनोरंजन की ताजा खबरें हिंदी में पढ़ें।

ज़रूरी लिंक

होम
हमारे बारे में
संपर्क करें
Privacy Policy
Disclaimer

प्रमुख श्रेणियां

राष्ट्रीय
राज्य
राजनीति
अंतर्राष्ट्रीय
खेल
मनोरंजन

हमसे संपर्क करें

प्रधान संपादक: Pankaj Kumar
कार्यालय: 190, Pratap Nagar, Mayur Vihar Phase-1, Delhi – 110091
ईमेल: sanchartimes.news@gmail.com
मीडिया संपर्क: media@sanchartimes.news

सोशल मीडिया पर जुड़ें

  • Facebook
  • YouTube
  • Instagram
  • X
  • WhatsApp

© Sanchar Times. All Rights Reserved.

Powered by PressBook WordPress theme

होमराष्ट्रीयअंतर्राष्ट्रीयराज्यराजनीतिखेलमनोरंजनसंपादकीयलाइफस्टाइलसोशल मीडिया