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India AI Impact Summit 2026 में रोबोडॉग विवाद : गलतफहमी या ‘नेशनल एम्बैरसमेंट’? क्या ‘ओरियन’ इनोवेशन था या रिसर्च टूल?

Posted on February 20, 2026February 20, 2026 By Chhavi Singh

क्या यह सिर्फ शब्दों की गलतफहमी थी या बड़े स्तर पर प्रस्तुतीकरण में चूक?

ST.News Desk

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रोबोटिक डॉग ‘ओरियन’ को लेकर उठे विवाद ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। एक तरफ यूनिवर्सिटी का दावा है कि उसने रोबोट को कभी अपना इनोवेशन नहीं बताया, बल्कि इसे छात्रों की रिसर्च और लर्निंग के लिए खरीदा था। दूसरी ओर सरकार ने इसे ‘मिसइनफॉर्मेशन’ और ‘नेशनल एम्बैरसमेंट’ करार देते हुए स्टॉल खाली करने का आदेश दे दिया। सवाल उठ रहा है—क्या यह सिर्फ शब्दों की गलतफहमी थी या बड़े स्तर पर प्रस्तुतीकरण में चूक?

सरकार ने चीनी रोबोट पर तोड़ी चुप्पी

आईटी सचिव S Krishnan ने स्पष्ट कहा, “एग्जिबिटर्स को ऐसे आइटम्स नहीं दिखाने चाहिए जो उनके नहीं हैं।” सरकार का कहना है कि समिट में केवल जेनुइन और ओरिजिनल कार्य को ही स्थान मिलना चाहिए।

18 फरवरी को संबंधित स्टॉल की बिजली काट दी गई और यूनिवर्सिटी को तत्काल एक्सपो खाली करने का निर्देश दिया गया। सरकारी सूत्रों ने इस घटना को ‘नेशनल एम्बैरसमेंट’ बताया। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि उन्हें कोई औपचारिक संचार नहीं मिला था। क्या संचार की कमी ने विवाद को और बढ़ाया?

“नवाचार को दबाना मकसद नहीं” : कृष्णन

जब पूछा गया कि क्या प्रदर्शित मॉडलों के विकास की पहले जांच नहीं होती, तो एस. कृष्णन ने कहा कि शिखर सम्मेलन प्रमाणीकरण मंच नहीं है, बल्कि एक प्रदर्शनी है।

उन्होंने कहा, “अगर हर प्रदर्शित वस्तु को प्रमाणित करना पड़े, तो लोग कहेंगे कि हम नवाचार को दबा रहे हैं। हमारा इरादा नवाचार को दबाना नहीं है।” लेकिन क्या ऐसे आयोजनों में न्यूनतम सत्यापन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए? क्या ‘मेक इन इंडिया’ जैसे थीम के तहत अतिरिक्त सावधानी अपेक्षित थी?

यूनिवर्सिटी की सफाई और माफी

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौड़ ने कहा कि प्रोफेसर नेहा सिंह ‘डेवलप’ और ‘डेवलपमेंट’ शब्दों को लेकर भ्रमित हो गईं।

उनके अनुसार, “हमने रोबोट को डेवलप नहीं किया, बल्कि उसके डेवलपमेंट पर काम किया। यह स्टूडेंट्स की रिसर्च के लिए खरीदा गया था।”

यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक माफी जारी करते हुए कहा कि किसी तरह का संस्थागत मिसरिप्रेजेंटेशन करने का इरादा नहीं था। प्रोफेसर नेहा ने भी कहा कि उनकी टिप्पणी को ‘मिसइंटरप्रेट’ किया गया।

फिर सवाल उठता है-क्या सार्वजनिक मंच पर शब्दों की जिम्मेदारी और भी अधिक नहीं होनी चाहिए?

राजनीतिक घमासान तेज

वीडियो वायरल होते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने सोशल मीडिया मंच X पर समिट को “डिसऑर्गेनाइज्ड PR स्पेक्टेकल” बताया और आरोप लगाया कि भारतीय प्रतिभा के बजाय चीनी उत्पादों को दिखाया जा रहा है।

सीपीआई(एम) सांसद John Brittas ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। शिवसेना (यूबीटी) की Priyanka Chaturvedi ने इसे शर्मनाक बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं टीएमसी के Saket Gokhale ने आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw से सवाल किया कि क्या यह सब उनकी जानकारी में हुआ?

क्या यह तकनीकी चूक थी या राजनीतिक अवसर?

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

17 फरवरी 2026 को समिट के दूसरे दिन गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर ‘ओरियन’ नामक क्वाड्रूपेड रोबोट प्रदर्शित किया गया। इंटरव्यू के दौरान प्रोफेसर नेहा सिंह ने दावा किया कि यह यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित किया गया है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने तुरंत पहचान लिया कि यह रोबोट दरअसल चीनी कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल है, जो बाजार में 2.5 से 3 लाख रुपये के बीच उपलब्ध है। इसके बाद ‘मेक इन इंडिया’ थीम के बीच चीनी उत्पाद को अपना बताने के आरोप लगने लगे।

गलतफहमी या बड़ा सबक?

समिट अभी जारी है, लेकिन यह घटना ‘मेक इन इंडिया’ और AI इनोवेशन की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि यह सिर्फ एक रिसर्च टूल था, न कि इनोवेशन का दावा।

लेकिन क्या राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति देते समय पारदर्शिता और स्पष्टता सर्वोपरि नहीं होनी चाहिए?
क्या यह महज कम्युनिकेशन गैप था या भविष्य के आयोजनों के लिए एक बड़ा सबक?

जवाब भले अलग-अलग हों, लेकिन बहस अभी थमने वाली नहीं है।

राष्ट्रीय

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