उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। मतदाता सूची के प्रकाशन में देरी और ओबीसी आयोग के गठन में अड़चन के चलते चुनाव मई-जून में होना मुश्किल नजर आ रहा है
ST.News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अब तय समय से आगे खिसकते दिख रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की फाइनल वोटर लिस्ट के प्रकाशन की तारीख बढ़ाकर 10 जून कर दी है, जबकि पहले यह 22 अप्रैल को जारी होनी थी। इस फैसले से समय पर चुनाव कराने की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है।
दरअसल, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत चुनाव के लिए तैयारियां कई स्तर पर अटकी हुई हैं। आयोग के मुताबिक 21 अप्रैल से 28 मई 2026 तक मतदाता सूची के कंप्यूटरीकरण और डुप्लीकेट नाम हटाने का काम किया जाएगा। इसके बाद 29 मई से 9 जून तक बीएलओ और अन्य कर्मी मतदान केंद्रों की मैपिंग, वार्डों की नंबरिंग और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद 10 जून को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
मतदाता सूची को लेकर देरी का यह सिलसिला नया नहीं है। पहले 15 जनवरी को सूची जारी होनी थी, लेकिन इसके बाद फरवरी, मार्च और फिर 22 अप्रैल की तारीख तय की गई। अब पांचवीं बार इसे आगे बढ़ाया गया है, जिससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में निराशा है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने दिसंबर में जारी अनंतिम मतदाता सूची में करीब 12.69 करोड़ वोटर दर्ज किए थे, जो पिछले पंचायत चुनाव की तुलना में 40 लाख ज्यादा थे। इस पर बड़ी संख्या में आपत्तियां और दावे आए, जिनके निस्तारण के बाद ही अंतिम सूची जारी की जानी है।
उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी पंचायत चुनाव समय पर कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई लगातार टल रही है। अदालत ने पहले निर्वाचन आयोग से पूछा था कि क्या मई-जून में चुनाव कराना संभव है, लेकिन अब तक इस पर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 243 (ई) का हवाला देते हुए पंचायतों का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा बढ़ाने को गलत बताया गया है और समय रहते चुनाव कराने की मांग की गई है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का अधिकार है और अंतिम फैसला सरकार ही लेती है।
सबसे बड़ा पेंच ओबीसी आयोग के गठन को लेकर फंसा हुआ है। आयोग के बिना आरक्षण तय नहीं हो सकता, और इसकी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के करीब टाले जा सकते हैं।
अगर चुनाव में और देरी होती है, तो पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल, चुनाव की तारीख को लेकर असमंजस बरकरार है और सभी की नजरें सरकार और चुनाव आयोग के अगले फैसले पर टिकी हैं।

