तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त हलचल मची हुई है। विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेट्री कझगम) बहुमत के जादुई आंकड़े से अभी भी दूर है। 108 सीटें जीतने के बावजूद सरकार गठन का रास्ता आसान नहीं दिख रहा। इसी वजह से अभिनेता से नेता बने विजय अब समर्थन जुटाने की बड़ी राजनीतिक परीक्षा से गुजर रहे हैं
ST.News Desk
चुनाव नतीजों के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं। विजय ने अपने जीते हुए दो सीटों में से एक सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद टीवीके के विधायकों की संख्या घटकर 107 रह गई। इसके बाद विजय लगातार दूसरे दिन तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलने पहुंचे। दो दिनों में यह उनकी दूसरी मुलाकात थी, लेकिन अब तक उन्हें सरकार बनाने का औपचारिक न्योता नहीं मिला है।
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने विजय से 118 विधायकों के समर्थन पत्र दिखाने को कहा है। हालांकि विजय ने भरोसा दिलाया है कि वे विधानसभा में बहुमत साबित कर देंगे। इस बीच कांग्रेस ने टीवीके को अपना समर्थन दे दिया है। कांग्रेस के पांच विधायकों के साथ विजय के समर्थन में संख्या 112 तक पहुंच गई है, लेकिन बहुमत के लिए अभी भी छह और विधायकों की जरूरत है।
अब तमिलनाडु की छोटी पार्टियों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। टीवीके की बातचीत पीएमके, सीपीआई, सीपीएम और वीसीके जैसे दलों से जारी है। हालांकि अभी तक किसी भी पार्टी ने खुलकर अंतिम समर्थन की घोषणा नहीं की है। शुरुआती अटकलों के विपरीत एआईएडीएमके गठबंधन ने भी साफ कर दिया है कि वह विजय की पार्टी का समर्थन नहीं करेगा।
इधर दो सीटों वाली वीसीके के प्रमुख टी तिरुमावलवन ने राज्यपाल से मुलाकात कर विजय को सरकार बनाने का मौका देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर राज्य की राजनीति में हस्तक्षेप कर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया।
कम्युनिस्ट दलों का रुख भी फिलहाल विजय के पक्ष में झुकता दिखाई दे रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने राज्यपाल से संविधान के अनुसार काम करने की अपील करते हुए कहा कि शपथ से पहले बहुमत साबित करने की शर्त उचित नहीं है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के एसआर बोम्मई फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सबसे बड़ी पार्टी को सदन में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
वहीं सीपीएम ने पुष्टि की है कि विजय की ओर से उन्हें समर्थन का अनुरोध मिला है और पार्टी की राज्य समिति की बैठक में इस पर फैसला लिया जाएगा। राज्य में सीपीआई और सीपीएम के पास दो-दो विधायक हैं, ऐसे में शुक्रवार तक इन दलों का रुख तमिलनाडु की सत्ता की तस्वीर साफ कर सकता है।
फिलहाल तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण हर घंटे बदल रहे हैं और सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा जुटाकर पहली बार सत्ता तक पहुंच पाएंगे या नहीं।

